श्रेया की शादी से वापस आते हुए सृष्टि मन ही मन मुस्कुरा रही थी । आकाश उससे अकेले में मिलना चाहता था ।  सृष्टि का दिल जोर से धड़कने लगा । कहीं आकाश उससे प्यार तो नहीं करने लगा । कुछ दिनों से सृष्टि भी ऐसा ही महसूस कर रही थी । 

                        हर्षवर्धन का घर

सृष्टि :  पापा मुझे पेट दर्द हो रहा है ।

हर्षवर्धन :  क्यों ? क्या हुआ ? शादी में ज्यादा तो नहीं खा लिया ?

सृष्टि :  नहीं पापा, मुझे कुछ अच्छा सा नहीं लग रहा है ।उल्टी जैसा मन हो रहा है ।

अभी सृष्टि कुछ कहना ही चाहती थी कि उसे उल्टी होने लगी। हर्षवर्धन घबरा गया, जल्दी से डॉक्टर को फोन किया । नौकर को बुलाया । सृष्टि को वहीं सोफे पर लिटा दिया, उसे बहुत पसीने आ रहे थे । तभी यश और हिमांशु भी आ गए ।

यश :  क्या हुआ भैया ?

हर्षवर्धन : पता नहीं, अभी तो शादी से लौटे हैं ।आते ही कहा कि पेट दर्द हो रहा है और अब उल्टी होने लगी ।

हिमांशु ने हॉस्पिटल जाने के लिए गाड़ी निकाली और सभी सृष्टि के साथ हॉस्पिटल गए । 

                         हॉस्पिटल

डॉक्टर :  मैंने चेकअप कर लिया है । डरने की कोई बात नहीं । सुबह तक बिल्कुल ठीक हो जाएगी । शायद इसने कोई जहरीली चीज खाली है, पर बहुत कम मात्रा में या कोई जहरीला कीड़ा भी हो सकता है ? पर अब सब ठीक है ।

हर्षवर्धन सिर पकड़ कर बैठ गया ।

हर्षवर्धन :  हे भगवान, यह क्या हो रहा है मेरी बच्ची के 
साथ ।

सुबह जब सृष्टि की आंख खुली तो उसे अपनी तबीयत ठीक लगी, पर वह कमजोरी महसूस कर रही थी । हर्षवर्धन उसके पास आए और सिर पर हाथ फेरते हुए कहा ।

हर्षवर्धन :  अब कैसा लग रहा है ?

सृष्टि :  अब मैं ठीक हूं, पापा । आप सारी रात यहीं थे, सोए भी नहीं ?

हर्षवर्धन :  तुम मेरी चिंता मत करो, मैं ठीक हूं । मैं डॉक्टर से मिलकर आता हूं ।

डॉक्टर :  सृष्टि अब ठीक है, पर कुछ दिन इन्हें घर का हल्का खाना दीजिए । बाहर का बिल्कुल भी कुछ ना खाएं । शाम तक आप इन्हें घर ले जा सकते हैं ।

शाम को सृष्टि घर आई । उसे आकाश की बहुत याद आ रही थी । आकाश से आज उसे मिलना था । रात को सृष्टि ने आकाश को फोन किया और ना मिलने के लिए सॉरी कहा । साथ ही बता दिया कि अब कुछ दिन बाद ही मिल पाएगी । सृष्टि ने अपनी तबीयत के खराब होने के बारे में आकाश को कुछ नहीं बताया ।

सृष्टि के ठीक होने पर हर्षवर्धन को कुछ राहत महसूस हुई ।
वे आकाश के बारे में सृष्टि से कुछ पूछना चाहते थे, पर हर्षवर्धन ने सोचा, सृष्टि को बिल्कुल ठीक होने के बाद ही वे आगे कोई कदम उठाएंगे ।

आज सृष्टि बहुत दिन बाद बाहर निकली । अब वह बेहतर महसूस कर रही थी । आकाश को फोन करके उसने पहले ही बता दिया कि आज 4:00 बजे उन्हें कॉफी शॉप में मिलना 
है । सृष्टि के साथ दोनों बॉडीगार्ड भी थे । जब सृष्टि वहां पहुंची तो आकाश को इंतजार करते हुए पाया ।
आकाश सृष्टि को देखता ही रह गया । आसमानी रंग के सूट में वह बहुत ही अच्छी लग रही थी । उसने बालों को खुला छोड़ा हुआ था । कानों में बड़े-बड़े झुमके पहन रखे थे ।
सृष्टि उसके पास पहुंच कर बोली ।

सृष्टि :  क्या देख रहे हो ?

आकाश :  कहां से शुरू करूं और कहां खत्म । मेरे पास शब्द नहीं है । अप्सरा तुम्हारे जैसी ही होती होगी ?

सृष्टि जोर से हंसने लगी ।

सृष्टि :  पता नहीं था, क्या कहना है फिर भी कह दिया ।

आकाश :  सृष्टि, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं ।

सृष्टि :  हां, मैं भी ऐसा ही महसूस करती हूं ।

आकाश :  सृष्टि, मुझे लगता है तुम्हारे पापा मुझे पसंद नहीं करते । उस दिन मुझसे मिलकर उन्हें कोई खास खुशी नहीं हुई ।

सृष्टि :  नहीं, ऐसी बात नहीं है आकाश । दरअसल आजकल वे मेरे लिए बहुत परेशान रहते हैं । अगर वे तुम्हें ना पसंद भी करते होंगे तो मैं उन्हें मना लूंगी । पापा मुझे बहुत प्यार करते हैं ।

आकाश :  सृष्टि, मैंने इसीलिए तुम्हें बुलाया है । यदि तुम उन्हें ना मना सकी । तो तुम्हारे लिए बड़ी मुश्किल होगी ।
तुम्हें, मुझे या पापा दोनों में से किसी एक को चुनना पड़ेगा ।
मैं तुम्हारे साथ जीवन बिताने के सपने देख रहा हूं, पर मैं यह भी नहीं चाहता कि हम अपनों को नाराज करके साथ रहे ।
इसलिए हमें ऐसा करना चाहिए, जब तक तुम्हारे पापा मुझे पसंद नहीं करते हमें नहीं मिलना चाहिए ।

सृष्टि :  मैंने तो सुना है, ऐसी कंडीशन में लड़का लड़की को घर से भागने या बगावत करने या फिर मरने की सलाह देता है और तुम मेरे पापा को मनाने पर जोर दे रहे हो । मेरी नजर में तुम्हारा प्यार और बढ़ गया है । तुम फिकर ना करो मैं आज ही बात करूंगी । 

                                          

            क्रमशः


                     धनु दयाल