दिल ए जहां मैं तुम्हें, महफूज  रखना चाहते हैं,
दरिया ए दिल ए दर्द से आबाद रखना चाहते हैं।

जख्म के छूटने से हम तुम्हारी सूरत भूल ना जाए, इसलिए  इस  जख्म  को  नासूर  करना चाहते हैं।

बहुत ही रौनक है हमारे दिल में तुम्हारी यादों से, इसलिए तुम्हें अपने दिल में जगह देना चाहते हैं।

मुश्किल है जमाने में मोहब्बत को कबूल करना
वफ़ा के नाम इश्क की बुनियाद रखना चाहते हैं। 

कहीं ऐसा ना हो, किसी मुकाम पर भुला दो हमें,
इसीलिए हम तुमको अपने पास रखना चाहते हैं।

इतना मुश्किल भी नहीं दर्दे वफा के साथ जीना।
तुम्हारे किये गए गुनाह को माफ करना चाहते हैं।

                                 अम्बिका झा ✍️