आंखो ही नही रूह से भी अश्क़ बहता हैं
जब भी कोई बात शहादत की करता हैं
हमें महफूज़ रखने की खातिर
हर रोज़ ही उस शरहद पर कोई मरता हैं

ये शहीदी का रिवाज और कब तक चलेगा
युद्ध के प्रचंड आहूत में और क्या क्या जलेगा

ऐ काश की कोई किसी का दुश्मन न होता
तो एक पुत्र, पिता,भाई और पति शहीद न होता माँ की गोद सुनी न होती न बच्चा अनाथ होता
बहन की राखी न रोती, न पत्नी विधवा होती

ये शहीदी का रिवाज और कब तक चलेगा
युद्ध के प्रचंड आहूत में और क्या क्या जलेगा

अभी उम्र ही क्या थी उस भारत माँ के बेटे की
कुछ फ़र्ज़ अधूरे हैं खुद के अपने परिवार की
माँ बाबा का चारधाम पत्नी संग हिल स्टेशन
अब तक अधूरी हैं संग सैर सपाटे बच्चों की

ये शहीदी का रिवाज और कब तक चलेगा
युद्ध के प्रचंड आहूत में और क्या क्या जलेगा

उत्सव जब होगा, आएगी होली और दीवाली
घर के चिराग बिन हर कोना होगा खाली खाली
रंग गुलाल,पटाखे त्योहार सब लगेंगे बेमानी
बिन पिया के कैसे सजेगी सुहाग की थाली

ये शहीदी का रिवाज और कब तक चलेगा
युद्ध के प्रचंड आहूत में और क्या क्या जलेगा

राजीनीति इस शहादत पर कर के चले जायेंगे
श्रंद्धाजलि के आड़ में रुपया पैसा पकड़ायेगे
पर घर के चिराग बुझ जाने की कीमत क्या हैं
ये ढोंगी राजनेता लोग कभी न समझ पाएंगे

ये शहीदी का रिवाज और कब तक चलेगा
युद्ध के प्रचंड आहूत में और क्या क्या जलेगा

एक ही सवाल अपने अंतर्मन से सब करते हैं
किसलिए किसके लिए कब क्या और क्यों
ऐसी दुःखद घटनाएं नित्य ही घटते रहते हैं
अंत हो शहीदी प्रथा का दुआ यही हम करते हैं

ये शहीदी का रिवाज़ और कब तक चलेगा
युद्ध के प्रचंड आहूत में और क्या क्या जलेगा

ऐसा भयावह दृश्य देख आंखों में आंसू रहता हैं
बन्द हो खून खराबा ,पड़े न जरूरत युद्ध का
शांत धारा बन बहे जैसे नदी का पानी बहता हैं
मन भी विचलित होकर अब यही कहता हैं

ये शहीदी का रिवाज और कब तक चलेगा
युद्ध के प्रचंड आहूत में और क्या क्या जलेगा

         शहीदों को मेरा शत शत नमन
                      🙏🙏🙏

                                          🖊️🖊️🖊️
                                      थ्रीमा विनोद साहू