ऐसी रचना का निर्माण करूं 
जो जीवन में प्राण भर दे ।

ऐसी सुखद रचना गढ़ूं
जो होठों पर मुस्कान ला दे।

ऐसा कुछ लिख दूं
जो हर किसी को सुख दे ।

ऐसी कोई बात कहूं
जो हृदय को प्रेम से भर दे ।

ऐसी कोई प्रार्थना रचूं
ईश्वर से रूबरू कर दे ।

गहन अंधेरों से निकालूं
जीवन में उजाला भर दे ।

ऐसा कोई भाव रखूं
जो अंतर्मन को शांत कर दे ।

ऐसी कोई आवाज बनूं
जो दिल पर जादू कर दे ।

रचना मेरी ऐसी हो
जो सत्य उजागर कर दे ।

चरित्र को बना दर्पण
जो सामने अपने रख दे ।


      

            धनु दयाल