दुनिया बहुत बड़ा है मेला
हरदम चलता रहता खेला
और कमाल की बात यही है
फिर भी हर इंसान अकेला
*
बड़े मंच के बड़े खिलाड़ी
इस मेले में बने अनाड़ी
चले गए किरदार छोड़कर
आई बिछड़ने की जब बेला
*
साधु संत महात्मा ज्ञानी
कहते हैं दुनिया है फानी
नहीं बताकर राज गए वह
पीछे छोड़ गए हैं झमेला
*
होगी कैसे खत्म कहानी
कभी ना रूकता बहता पानी
थाह नहीं जल की धारा का
आंचल दूर-दूर तक फैला
डॉक्टर /इंजीनियर
मनोज श्रीवास्तव

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