दुनिया बहुत बड़ा है मेला 
हरदम चलता रहता खेला
और कमाल की बात यही है
 फिर भी हर इंसान अकेला
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बड़े मंच के बड़े खिलाड़ी
इस मेले में बने अनाड़ी
चले गए किरदार छोड़कर
आई बिछड़ने की जब बेला
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साधु संत महात्मा ज्ञानी
कहते हैं दुनिया है फानी
नहीं बताकर राज गए वह
पीछे छोड़ गए हैं झमेला
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होगी कैसे खत्म कहानी
कभी ना रूकता बहता पानी
थाह नहीं जल की धारा का
आंचल दूर-दूर तक फैला
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डॉक्टर /इंजीनियर 
मनोज श्रीवास्तव