हे जगततारिणी ,जगदम्बा ,स्वागत आपका नवरात्रों में,
सद् बुद्धि, सत्मर्ग, प्रशस्त करो ,स्वागत आपका नवरात्रों में!!
हे चितरूपा, हे भवप्रीता, आन विराजो आसन में ,
श्रृष्टि को भक्तिमय कर देती, हर लेती तम नवरात्रों में ,
ये जन्म मरण का बंधन छूटे, मां तेरे आशिषों से,
एक अलख भक्ति की जग जाती, मां तेरे नवरात्रों में!!!
हे ब्रह्मवादिनी, हंसवाहिनी ,वर विद्या का देना मां,
शब्दों को मुखरित कर पाऊं,वाणी में स्वर मैं भर पाऊं,
ना भटकूं मैं मृगतृष्णा में ,भवसागर से तर जाऊं ,
हे नवदुर्गा , हे कूष्मांडा ,स्वागत तेरा नवरात्रों में!!!
नौ दिन तेरा श्रंगार सजे मां , आंगन महके फूलों से,
दुनिया मेरी खुशहाल करो मां,अपने चरणों की धुलों से,
हर मन का तिमिर मिटा दो मां,अपने आशीष से,
हे नारायणी , हे शिवदूती, स्वागत आपका नवरात्रों में!!!
अवतारों इस वसुधा में मां,हमें जरूरत आपकी,
मर्दन करो उस दानव का,जो छेद रहा प्रकृति सारी,
मां रण चंडी बन आ जाओ,सुनो विनय हे कात्यायनी,
अपने शस्त्रों से वार करो,श्रृष्टि का तुम कल्याण करो !!!
हे जगततारिणी, जगदम्बा स्वागत आपका नवरात्रों में !!!
स्वरचित ,मौलिक
कीर्ति चौरसिया
जबलपुर (मध्य प्रदेश)

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