अंशु शादी के बाद आज पहली बार रसोई में आई । सास ने मुस्कुराते हुए कहा - "आटा तो मैंने गूंद दिया है, तुम रोटी बना लो । "जी मम्मीजी" कहकर अंशु रोटी बेलने के लिए सूखा आटा निकालने लगी ।
सास ने कहा - "सूखा आटा वहां अलग बर्तन में रखा है, ले
लो । अंशु, सूखा आटा हमेशा अलग रखना, आटे के डिब्बे में मत डालना । सूखा आटा अलग रखने से घर में बरकत आती है ।
अंशु ने हैरानी से पूछा - "मम्मीजी, सूखा आटा अलग रखने से घर में बरकत कैसे हो सकती है । ऐसा होता तो कोई भी गरीब नहीं होता ।"
"हां, तुम अंग्रेजी पढ़े लोग कुछ मानते तो हो नहीं ।"
"नहीं मम्मीजी, ऐसी बात नहीं है । मेरे मायके में भी ऐसा सूखा आटा अलग ही रखा जाता है, लेकिन इसका कारण बरकत नहीं बल्कि है कि सूखा आटा ज्यादा देर तक बाहर रहता है और गीले आटे के संपर्क में भी आता है, जिससे इसमें नमी आ जाती है । खासकर बारिश के दिनों में ।
इसलिए इसे अलग ही रखा जाना चाहिए । जिससे डिब्बे के आटे में नमी न पहुंचे और कीड़े न हो ।"
"अरे, कारण कोई भी हो पर अलग तो रखना चाहिए न ।"
अंशु ने मुस्कुराते हुए कहा - "हां मम्मीजी, मैंने जो कारण दिया उसका वैज्ञानिक आधार था और आपने जो कारण दिया वह अज्ञानता, अंधविश्वास था।"
"तुम ठीक कहती हो अंशु । चल, अब ये बता तुम्हें मूंग की दाल का हलवा बनाना आता है ?" सास ने चुटकी लेते हुए कहा ।
"नहीं मम्मीजी, वो तो नहीं आता ।" अंशु ने झेंपते हुए कहा ।
"तो ठीक है, तू अपने नए ज़माने की बातें मुझे बताना और मैं तुम्हें अपने जमाने की । बोल ठीक है न ।"
और फिर दोनों खिलखिलाकर हंसने लगी ।
धनु दयाल

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