बन्द नही हैं सफलता का ,मेहनत से खोलना होगा।।
दरवाज़ा...
ढीला नहीं अधिकारों का , हक़ से बोलना होगा।।
दरवाज़ा...
रुका है इंसानियत के लिये, कर्त्तव्यों से तोलना होगा।।
ताला लगाकर कर रखा हैं क्यों ख़ुदको ए बन्दे
खुश होकर जी, तेरी आत्मा को टटोलना होगा।। 


भारती प्रवीण...✍️💕