जन्मदिन आकर बता गया
हो गए एक साल और पुराने
मनाई खुशियां, गाएं तराने
उपहार भी मिल गया इसी बहाने ।
जन्मदिन बताता
हम जन्म से दूर
मृत्यु के करीब आ रहे हैं
यही गम छुपा रहे हैं ।
जन्म का दिन, मृत्यु का दिन पर
किसी का नहीं है वश
ये कुछ ऐसी बातें
इंसान है बेबस ।
जन्म और मृत्यु के बीच
जीवन को होश में जीना है
दुख हो या सुख
उसकी रजा़ में रहना है ।
धनु दयाल

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