आईने में दिखी *परछाईं* ने इतिहास रच दिया।
पन्नो पर *पद्मावती* का नाम अमर कर दिया।।

दिल्ली शासक अलाउद्दीन खिलजी का मन,
हो गया था रानी पद्मावती को पाने में पागल।

सुंदर रूप के जिसके चर्चे हो रहे थे घर घर,
उस रानी पद्मावती का था एक दिन स्वयंवर।

चित्तोड़ राजपूत राजा रावल रतन सिंह के साथ,
दे दिया खुशी खुशी पद्मावती का हाथों में हाथ।

देश निकाल दिये गए राघव चेतन ने ठाना बदला,
चित्तोड़ के विनाश हेतु अलाउद्दीन को पकड़ा।।

उस संगीतकार ने बांसुरी से मोहा राजा का मन,
साथ बताया रानी पद्मावती का  सुंदर यौवन।।

रानी को पाने चित्तोड़ पर की उसने चढ़ाई,
पर इतनी आसानी से वहाँ जीत न हो पाई।।

अपनायी कुटिल नीति, रावल सिंह को बनाया बंदी,
बड़ी कुशलता से रानी, छुड़ाकर पति को चल दी।

भारी विशाल सेना के साथ फिर से किया युद्ध,
चितोड़ को पराजित किया, चाल नीति विरुद्ध।

सती को पति के सिवा न सुहाय अन्य स्पर्श,
सारी महिलाओं के साथ स्वीकार किया जौहर।

पद्मावती सहित सारी वीरांगनाएँ आग में पड़ी कूद,
जीत कर भी मिली हार, अलाउद्दीन गया टूट।।

*यहाँ सिर्फ मिलती है इतने पवित्र चरित्र की गाथा,*
*तभी तो इसे शान से सब कहते है भारत माता।।*

✍🏻✍🏻 *प्रियंका (पंखी)* 🕊🕊