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सावन की घटा से बाल लिए 
कमल से नयन लिए 
गुलाब सी मुस्कान लिए 
सुराही सी गर्दन लिए 
नाजुक सी कमर लिए 
गजगामिनी सी चाल लिए 
इतराती इठलाती नारी 
हल्के हल्के कदम लिए     
आती अरमानों की बारात लिए 
भरती आशाएँ और प्यार से कहती 
तुम ही हो दिल का चैन 
एक बार मिल जाओ जीवन की बहार के लिये

                  अंजू