फूल भैया फूल भैया, 
बताओ हमें तुम, 
रहते कैसे खुश हो तुम, 

देखा है हमने तुमको,
गर्मी में होती तपन भारी, 
फिर कैसे खड़े खड़े, 
मुस्कुराते हो तुम, 
सुन कर फूल बड़ा, 
खिलखिलाया, 
फिर हँसकर बोला वो, 
सुनहरी धूप में भी मुझको, 
मिल जाती है, 
थोड़ी सी, 
सुकून भरी छाया, 
शाम होते होते ही, 
तपकर कुंदन जैसी, 
होती मेरी काया, 
पड़ती है फिर, 
पानी की फुहार, 
वो ठंडी ठंडी, 
शीतल पवन के झोंके, 
लगते जब मुझको, 
झूम उठता हूँ मैं, 
क्षण भंगुर है, 
मेरा तो ये जीवन,

फूल भैया, फूल भैया, 
बताओ हमें तुम, 
रहते कैसे खुश हो तुम, 

बारिश आती जब, 
आँधी आती जोरों से जब, 
कड़कती है बिजली भी, 
फिर जोरों से, 
कैसे सम्हल पाते हो तुम, 
फूल मुस्कुराया, 
कैसी बात करते हो, 
भाई मेरे तुम, 
बारिश का मौसम तो, 
क्या खुशनुमा होता, 
मौसम बड़ा ही प्यारा, 
क्या आँधी पानी ओ बिजली, 
न डिगा पायीं कभी मुझे, 
बारिश आयी जोरों की तो, 
खुश बहुत हो जाता हूँ, 
झूम झूम कर, 
मन मेरा नाचे है, 
मयूर जैसा, 
आँधी बिजली में भी, 
लहर लहर कर, 
इतराता फिरता हूँ, 
बहुत खुश होकर, 
जीता हू़ अपना जीवन, 
क्षण भंगुर है, 
मेरा तो ये जीवन, 

फूल भैया, फूल भैया, 
बताओ हमें तुम, 
रहते कैसे खुश हो तुम,

ठंडी की ऋतु, 
आती है जब बहुत, 
जाड़ा सताता है बहुत जब, 
पाला भी पड़ जाता, 
फिर कैसे है चैन पाते, 
फूल फिर मुस्कुराया, 
बोला वो हँसते हँसते, 
क्या कह रहे हो मेरे भाई, 
ठंडी की ऋतु तो, 
होती है बड़ी सुहानी, 
गुलाबी गुलाबी वो ठंड, 
अब आने को है भाई, 
ये वादियां हमारी, 
मंद मंद पवन वो, 
आती दूर मलयाचल से, 
मदहोश कर जाती है वो, 
सजी ये चाँद सितारों की,
फिर वो महफिल, 
अजब रंग जमाती है, 
काया तो फिर देखो मेरी, 
क्या दमकती है, 
फूल फूल कर, 
गाल कपोल मेरे, 
लाल हुये जाते हैं, 
क्या जीवन पाया है मैंने,
मदहोशी का मुझ पर, 
छा जाता है आलम, 
जी लेता हूँ मैं भरपूर, 
क्षण भंगुर है, 
मेरा तो ये जीवन, 

फूल भैया, फूल भैया, 
बताओ हमें तुम, 
रहते कैसे खुश हो तुम, 

कहाँ से आयी तुम में, 
इतनी दुनियादारी, 
पायी ये सीख, 
कहाँ है तुमने, 
मुझसे तो तुम अब,
सच ही सब कहना, 
जीवन से अपने, 
हो गया हूँ परेशान में, 
माना है मैंने तुमको, 
दोस्त प्यारा ही अपना, 
फूल खिलखिलाया जोरों से,
मुस्कुरा कर फिर बोला वो, 
मेरे भाई मेरे दोस्त, 
जीना तो है यहाँ, 
गर्मी हो बरसात, 
या हो जाड़े की ऋतु, 
खुश रहना है हर हाल,
रो रो के क्या जीना, 
कैसी भी क्यों न आये, 
परिस्थितियाँ जीवन में, 
करो मुकाबला, 
उनसे डट कर तुम, 
जीवन में कभी, 
न मानों तुम हार, 
जीना तो है मेरे यार, 
ईश्वर की नियामत से, 
मिला हमें जीवन, 
मैंने तो समझ लिया, 
फलसफा जिंदगी का, 
मेरे भाई तू भी समझ ले, 
क्षण भंगुर है, 
मेरा तो  जीवन,
जीना तो है यार,
जिंदादिली से क्यों न जियो, 
मिला है जीवन मेरे यार ।


         काव्य रचना -रजनी कटारे 
                जबलपुर (म.प्र.)