पता नहीं कब किस वक्त क्या हो जाए
जागने वाला कब सो जाए...
कहर कोरोना का काल रूप बन गया
मौत का संकेत वास्तविकता दे बन गया...
कोई अपनों से दूर है, कोई हमेशा के लिए हो गया
कोरोना के कारण, क्या से क्या हो गया
आने वाला भविष्य और वर्तमान भी थम सा गया
क्या सोचा था हर किसी ने और परिणाम क्या से क्या हो गया
आज हूं पता नहीं कल रहूंगा भी या नहीं
अपना भी लिखने का मन अब थम सा गया
जो होना सो होयगा ,नहीं मानूंगा हार
समय चुनौती दे रहा, लेकर कोरोना अवतार
विधना तेरे हाथ में जीवन और मौत का खेल
तेरे हाथों में बाजी सब हम सब जौकर एक
मन की वेदना बोल रही अंतर्मन सब बोल
जो होना सो होयगा व्यर्थ परिणाम मत कर शोक
जब तक है जिंदगी जी लो जरा
बस एक कहानी रह जाएगी
🙏 कागजों और सोशल मीडिया पर बस
✍️लक्ष्मीनारायण

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