आधुनिकता बुरी नहीं इसकी भी है कोई सीमा
देर रात तक क्लबों में घूमते
सुरा मदिरा का पान हो करते
सिगरेट पीते खुशी समझते
समाज में फैली कुरीतियों को अपनाते
आधुनिकता के नाम पर
रीति रिवाज का शोषण करते
रात देर से तुम सोते हो
कभी ना भोर का सूरज देखते
भोर का सूरज जो देता है
तुम्हें ताजगी, प्रसंता ,स्फूर्ति
उसको तुम नाहक खो देते
मात पिता को वृद्ध आश्रम भेजते
कहां से मिलेगी प्यार की छाया
नौकरी के परिवेश में बच्चे
सीख रहे कुछ अलग ही भाषा
बच्चे अवसाद में भटकते
कुछ तो जीवन ह्रास है करते
पढ़ो लिखो सुशिक्षित बनो
निर्बल का सहारा बनो
नर नारी का शिक्षित होना
बड़े गर्व की बात है ये
हर क्षेत्र में आगे बढ़ना
करना एक दूजे का सम्मान
पढ़ाई पढ़ाई नहीं सिखाती तुमको
बड़ों का ना करो सम्मान
बड़े प्यार से चलते थे पहले
जहां हुए संयुक्त परिवार
अब एकल परिवारों पर तुमको
हो रहा है बड़ा ही नाज
बिन शादी के संग में रहते लड़का लड़की
"लव इन "का दिया है नाम
पहले भी होती थी शादी
मिलकर रहते थे सब
थोड़ा संयम समझ बूझ से
जीवन करते थे वे उन्नत
वाह रे आधुनिक समाज
लौट आओ आधुनिकता के संग
रिश्तो का सम्मान करो
माता-पिता का सम्मान करो
बच्चों को दो अच्छे संस्कार
आधुनिकता के बहकावे में
बुढ़ापा अपना ना बिगाड़ो तुम
क्यों नहीं कुछ ऐसा करते
नए को अपनाकर,पुराने को संग ले चले हम
पुरानो के पास अनुभव का हे असीम भंडार
अनुभव उनसे ले लो तुम
मेहनत का रंग भर लो तुम
पुरातन को नया करो,
जीवन बेहतर कर लो तुम।।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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