दोस्तों वैसे मैं भूत प्रेत को आज तक नहीं मानता ना ही मेरा विज्ञान इसकी होने की पुष्टि करता है। लेकिन कहानी में कल्पनाएं करके मैं शायद कोई भूतिया कहानी जरूर लिख देता हूं । शायद आपको पसंद आएगी । मेरी नानी से मैंने जिद करके आखिर, ठाकुर का कुआ वाली कहानी सुन ही ली ....नानी कहने लगी.... . आज से करीब तीन सौ साल पहले की बात है । पुराने समय में जात-पात पात को लेकर बहुत नियम कानून थे । सभी जाति वालों का अलग -अलग कुआँ भी होता था। वह ठाकुरों के सामने कोई नीच अथवा छोटी जाति वाले हमेशा नजरें झुकाए एवं हाथ में चप्पल जूते लेकर निकलते थे । सिवाय जी हुजूर के ... अलावा अपनी शब्दावली पर डर डर कर बोला करते थे । . . एक बार की बात है , गर्मियों के दिन थे , चारों तरफ अकाल और भीषण गर्मी ने जयराम चौधरी का कुआं भी खाली कर दिया । उस समय हेडपंप अथवा मोटर नल नहीं होते थे । केवल नदिया, बावड़िया कुआ ही यही एकमात्र सहारा होते थे। जयराम बहुत परेशान था , वह एक ही कुआं है । हमारे चौधरी खानदान में , अब वह भी सूख गया है, पिछले दो दिन से पानी की एक बूंद भी नसीब हुई । मैं और मेरा चौधरी समाज पानी के संकट से टूटा जा रहा है । . . जय़राम ने फिर तोलिया बांधकर अपना मटका लेकर नंगे पैर जैसे तैसे एक प्रसिद्ध ठाकुर हवेली के पास गया। क्योंकि वह ठाकुर की हवेली पास में ही स्थित थी । हवेली के द्वार पर खड़ा अपनी अर्जी लगा रहा था । ठाकुर साहब है क्या...... द्वारपाल अरे जयराम चौधरी तुम सबसे पहले तो दूर रहो , जो कहना है बाद में कहना ....जरा दूर से ही कहिए ......जयराम चौधरी मुझे केवल एक ही मटका पानी दे दो माईबाप मेरे सरकार ....ताकि मैं अपने परिवार की प्यास बुझा सकूं , घर में छोटे-छोटे बच्चे ......पेड़ पौधों की पत्तियां चबा चबाकर .....जैसे तैसे प्यास बुझा रहे हैं ।. . सरकार अरे माई बाप इस गरीब का कुआं भी दो दिन सूखा पड़ा है , इतने में ठाकुर साहब आ जाते हैं । ठाकुर साहब........ के बात है , चौधरी तने क्या जरूरत आन पड़ी जो म्हारे हवेली पर गुहार लगाई....... जयराम चौधरी नीचे नजरें किये ए हुए...... माई बाप मेरे सरकार इस नीच जात पर दुआ करके केवल एक ही घड़ा पानी दे दो माईबाप मेरे सरकार ....... आपकी बड़ी मेहरबानी होगी सरकार.......। ठाकुर साहब अपने आगोश में घडे. पर लात मारकर उसे फोड़ देते हैं , और कहते हैं , हमारी हवेली से तू और तेरा चौधरी खानदान प्यासा मर जाएगा ......पर मन्ने कुएं से एक बूंद पानी ना दूं तोहे ....फिर ठाकुर साहब एक लात जय राम को मारकर उसका मटका फोड देता हैं..ओर उसे लात मारकर अपमान कर भगा देता है , और अशुद्ध कहकर स्वंय हजारों मटके से अपने आप को दिनभर नहाकर शुद्ध करने का प्रयास करते हैं । . . फिर वह वह जयराम चौधरी रोते बिलखते अपने आपको साहस बांधकर सोचता है । अगर मैं खाली हाथ घर गया तो बाल बच्चे और दुखी होंगे । वे सब कब कब तक पेड़ पौधे की पत्ती चबा चबाकर अपनी झूठी प्यास बुझाएंगे । धीरे-धीरे रात हो जाती है । जय राम चौधरी का मटका तो पहले ही फूट गया था । वह धीरे-धीरे रात रात के एक बजे के करीब ठाकुर की हवेली वाले कुअे से ओर पहरेदार से छुपते छुपाते हुए ता आखिर कुआं तक पहुंच जाता है । मटका तो था नहीं उस वक्त .....क्योकि ठाकुर के लात मारने के कारण वह फूट गया था..... कुएं पर रस्सी बंधी थी और चकरी वाले फेरी थी , पुरानी समय वाली जिसके कारण पानी भरने पर रफ्तार कम अथ्वा ज्यादा होती थी । और आवाज भी काफी आती थी , जैसे-तैसे वह अपनी तौलिया को भिगोकर डरते डरते अपने परिवार के पास गया सब के मुंह में पानी से भींगी तौलिया की कुछ ही बूंदे डाल पाया था । . ..... कि उसकी पत्नी और उसके बच्चों का प्यास के कारण भीषण गर्मी में अकस्मात तड़प तड़प कर उनकी मौत हो गई । यह दृश्य देख जयराम चौधरी बहुत जोर जोर से रोया और चिल्लाया उसने सोचा , दिन प्यासे रहकर हमारे बाल बच्चे को मैं जीते जी पानी की एक बूंद भी नहीं दे पाया । कैसा पिता हूं .....वह पागल सा हो गया ....उसने विलख विलख .... कर रोना शुरू कर दिया और अपना सिर पीटने लगा, और तो और किसी पहरेदार ने जय राम चौधरी को पानी भरते समय कुआं के पास उस वक्त देख लिया था । . . . वह अपनी चापलूसी और वफादारी निभाते हुए यह बात ठाकुर के कान में बढ़ा चढ़ाकर डाल दी , फिर क्या सुबह जयराम चौधरी अपने परिवार का अंतिम संस्कार करने वाला ही था...... कि ठाकुर ने उसी वक्त अपने आदमी भिजवा कर उसे हजारों कूड़े से तडपाया.. आया और उसे लहूलुहान कर उसे जिंदा ही अपनी कुएं में फिकवा दिया...... ठाकुर की यह नादानी धीरे-धीरे बड़े ठाकुर साहब के कान में पहुची लेकिन छोटे ठाकुर के जिद्दी स्वभाव के कारण बड़े ठाकुर के हाथ पैर कटवा कर उन्हें मजबूर कर दिया था ..... ठाकुर उस समय के ऐसे भी होते थे ।. . . फिर तीसरे दिन अचानक ठाकुर साहब सो रहे थे ,अपने हवेली वाले बगीचे में तो उन्हें एक आवाज सुनाई दी , हुजूर माई बाप एक ही मटका पानी दे दो.... माई बाप मुझे बस एक ही मटका पानी दे दो ... कई बार ठाकुर साहब के कानो में गूंजती रही वे सो नहीं पा रहे थे । वे तो पागल से हो रहे थे । उन्होंने जब कुएं में देखा तो उन्हें जयराम चौधरी मटका लिये खडा था । वे घबरा गए गुस्से में आकर ठाकुर साहब ने एक छोटा सा पत्थर फेंका । लेकिन वह पत्थर ठाकुर साहब के चेहरे पर वापिस लगा और वे खून से लथपथ घायल होकर चिल्लाने लगे .....जैसे तैसे आसपास के पहरेदार ने दवा दारू की । सुबह जब ठाकुर साहब नहा रहे थे , तो अचानक उनका पानी गायब हो गया । पास जाकर देखा तो कुआं लबा लब भरा था । . . . जब ठाकुर साहब को प्यास लगी तो जैसे ही लोटा उठाकर पानी पीना चाहा तो पानी भी गायब होने लगा ..यह क्या हो रहा है । ठाकुर साहब प्यास के कारण तड़प तड़प का मरने लगे ठाकुर के अलावा उसका खानदान भी प्यास के कारण तड़पने लगा धीरे-धीरे जैसे ही उस कुए का पानी कोई जब भी पीता तो वह पानी कभी खून बन जाता तो कभी पेड़ पौधों की पत्तियां ...बन जाता .. कभी पानी ही गायब हो जाता.... एक-एक करके सभी ठाकुर व वहां के रहने वाले समाज काल के गाल में मानो प्यासे तड़प-तड़प कर मरने लगे...। . . ..... नानी ने कहा .....आगे की कहानी बाद...... में पहले एक गिलास पानी पीना है मुझे ,.... जल्दी लाओ मैंने नानी को पानी देकर कहा.... कहानी बहुत अच्छी लग रही है ....ओर सुनाओ नानी जी.... सुनो तो फिर ............धीरे-धीरे ठाकुर के कुए के नाम से प्रसिद्ध होने लगा वह मौत वाला कुआं कुछ साल बाद उस गांव में फिल्म शूटिंग वाले कुछ अंग्रेज दूर से आए हुए थे , उन्हें ठाकुर की वीरान पड़ी हवेली काफी पसंद आई ....काफी पसंद आई बे करीब तीस चालीस लोग थे..। . . . . . एक अंग्रेज हवेली घूमते घूमते उस कुएं के पास पहुंचा उसे कोई कुछ मटके और पानी भरने की आवाज और किसी व्यक्ति की थकान वाली आवाज सुनाई दी.... उसने कुएं में देखा तो ठाकुरों की बहुत सारी लाशे ही लाशे दिखाई पड़ी थी । जैसे उसने अपनी पलकें झपकाईं तो पानी ही पानी दिखा ... जैसे ही पीछे मुड़ा उसे जयराम चौधरी ने अपने हाथों से खींचकर उसको कुओ में डुबो दिया । उस अंग्रेज की लाश लबा लब कुए में तैरने लगी उसके साथियों ने देखा तो घबरा गए ....कुआ अचानक कैसे भर गया जैसे ही लाश को निकाला जयराम मटका लिए कह रहा था , ... . . हुजूर माई बाप मुझे केवल एक ही मटका पानी दे दो मेरे सरकार । बस एक ही मटका पानी दे दो । अंग्रेज लोग टूटी-फूटी ही हिंदी समझ पा रहे थे , जैसे ही उन्होंने उसे गोली मारी जयराम चौधरी गायब हो गया । फिर आ गया फिर कहने लगा...... मांई बाप बस एक ही मटका पानी दे दो... जैसे तैसे उन्होंने हवेली में रात गुजारी पानी पीने की बारी आई तो सब कुछ पहले ही सूख गए थे ...आप केवल वह अंग्रेज की लाश वाला ही कुआं बचा था । उन्होंने सब बातों को नकारात्मक करके उसका पानी पीना चाहा तो पानी ही गायब होकर वह पेड़ पौधों की पत्ती में बदलकर रह गया ......ठाकुर की तरह अंग्रेज एक एक करके सारे के सारे तड़प-तड़प कर मरने लगे .....। .आज भी उस गांव में यह दृश्य सत्य हकीकत पर वास्तविकता में हो गया..... जयराम चौधरी भी आज भी वही कहता है हुजूर माई बाप एक ही मटका पानी दे दो..... आपकी बड़ी मेहरबानी होगी एक दिन कुछ साधु और सर्कस वाले अपने उद्देश्य से बीच रास्ते में आराम के कारण गांव में रूक गये....उनकी गाडी भी काफी गर्म हो रही थी , साधु ने पानी की तलाश की तो उस गांव में कोई एक भी नहीं दिखा बड़े-बड़े कच्चे घर और हवेली थी....कुए भी सारे सूखे हुए ही दिखे और सारे स्त्री-पुरुष के कंकाल ही मिले थे । ठाकुर वाले कुएं पर वे मुसाफिर पानी की तलाश में आ गये ..मटका जैसे ही भरा वह निकालते ही वह फूट गया . ऐसे ही हुआ हर बार फिर वह जयराम चौधरी भूत बनकर बोला ..साहब मेरे माईबाप मुझे केवल एक मटका पानी दे दो सरकार वस ..क्या सारे मुसाफिर यूं ही तड़प-तड़प कर मरने लगे ! ऐसा माना जाता है कि वह जयराम चौधरी आज भी उस कुआं के पास चौबीस घंटे खड़ा रहकर हर शख्स से यही कहता है ....एक ही मटका पानी दे पानी दे दो. मेरे माई बाप ....इतना कहकर मेरी नानी खत्म हो गई ... . .
क्या पता क्या हो गया मेरी नानी को.... क्यों कहानी कहते कहते ..मर गयी मेरी नानी ...कही .जयराम चौधरी ने तो नहीं बुला लिया मेरी नानी को.... ठाकुर के कुएं वाली कहानी आपको कैसी लगी । आपकी प्रतिक्रियाएं आमंत्रित हैं । बस इतना ही लिख कर मैं अपनी कहानी को विराम देता हूं । ठाकुरों का कुआं वाली कहानी समाप्त ।
जय राम जी की ! । . . . . ✍लक्ष्मीनारायण ठाकुर

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