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लाल चूड़ियां पहनूंगी, 
माथे पर बिंदिया लगाऊंगी, 
पैरों में चमकती पैजनिया--- 
मैं बार-बार छनकाउंगी,
देखो हवा के झोंके से---
चुनर भी लहराती है, 
यह हवा की सन सन भी--- 
कुछ मीठे गीत सुनाती है,
कुछ अनसुनी अनदेखी सी ---
कानों में आहट आती है,
तुम पास रहो या दूर रहो--- 
अनोखा अहसास दिलाती है,
ठंडी हवा का झोंका ---
तन को जब छू कर जाता है,
कुछ सुहानी यादों का---
मंजर  फिर से दोहराता है।


                  संगीता वर्मा✍✍