ये कैसी विवशता है ,ये कैसा तूफान है,
कैसे दाँव पर लगा रहा,इन्साँ को इँसान है।
सोचो जरा समझो जरा,संयम से कुछ काम लो,
सब धरा रह जायेगा,वो मान हो अपमान है।
कर्मपथ जटिल सही ,उसको अंगीकार कर,
भुजायें बलिष्ट है.बेकसूर पर न वार कर!
लक्ष्मीबाई बनो मगर,उनसा कार्य भी करों.
उनको नमन मै करू ,उन्है नमन तुम भी करो।
ऐसी कोई न जिद करो,अहंकार को बढने न दो"
जैसी हटेगी धुँध वो, शायद न नजर उठा सको!
क्षमा से बढकर ,सृष्टि मे कुछ भी बडा है न होगा कभी"
कुछ पल के बदले के लिऐं,खुद लिऐ दुआ करो.!!!
रीमा ठाकुर🙏🙏🙏🙏

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