नारी यदि बन जाती आरी,
   न कह पाते शास्त्र, नारी ताड़न की अधिकारी ।

        सीता यदि उठा लेती तलवार,
        न राम न रावण, कर पाते अत्याचार ।

        स्त्री यदि पढ़ लेती संविधान,
        पुरुष के है बराबर, हो जाता ज्ञान ।

        औरत यदि शिक्षा को बना लेती हथियार,
    बहुत पहले ही पा लेती, अपने सारे अधिकार ।
         
         अबला यदि ठान लेती, है कुछ करना,
         तभी बन पाती है सबला ।।



                   धनु दयाल