हे ईश्वर ऐ कोरोना कैसे कैसे मोड़ ले रहा है ,कितना घातक रूप लेकर पिछले साल की तरह बढ़ रहा है अब तो इसके लक्षण और भी तेजी से पांव पसारने लगे हैं।
 
प्रकृति का रौद्र रूप भी देखा है अपनी आंखों से पर साल 2020 ,2021 में कोरोना वायरस आकर काल रुप लेकर दहशत मचायेगा सोचा नहीं था, जिसे हम सब हल्के में ले रहे थे ।

बड़े-बड़े शहरों में अरे अपने एम.पी में आंकड़े देख कर लाशों पर लाशों के ढेर टी.वी पर देख रहा था

 श्मशान घाटो में जलाने के लिए लंबी-लंबी कतारों की भीड़  बढ़ रही है।
वही कब्रिस्तान में कब्र तक के लिए जगह कम पड़ रही
सवाल लाशे जलाने या दफनाने का नहीं है

सवाल है कोरोनावायरस महामारी बनके प्राणघातक रूप ले रहा है

कोरोना महामारी के आगे अच्छे-अच्छे बुद्धिजीवी तक नतमस्तक हो गए क्या कहूं आप सब को साहस प्रदान या खुद की असमंजस में उलझ जाऊ...

 मेरा अंतर्मन ,मेरी भावना, मेरा एहसास एक पल के लिए हतप्रभ रह जाता है...

 कोरोना की विनाशलीला कब रुकेगी क्या विदेशों की तरह हमारे भारत में भी कहीं...?



कई प्रश्न खड़े होते हैं मेरे मन में...?

ईश्वर ना करें ऐसा हो इस महा संकट की विषम परिस्थिति में क्या एकमात्र लाकडाउन लगाना और मास्क का उपयोग करते रहना क्या इसके इससे निजात दिलाएगा।

इस कोरोनावायरस से निपटने का कोई रामबाण उपाय  नहीं सूझ रहा...

कोरोना वैक्सीन बन‌ तो गई कितनी असरकारक सिद्ध होगी

कोई ना कोई कोरोना का समाधान जल्द से जल्द निकले
ईश्वर और आप सबसे बस यही अंतर्मन से हमेशा दुआ करता हूं।

कहते हैं प्रकृति खुद अपना संतुलन  कर लेती है
इस महा संकट से ईश्वर कुछ ना कुछ उपाय जरूर बताएगा किसी ना किसी रूप में...

चाहे वैक्सीन के रूप में या डॉक्टर या वैज्ञानिक  के रूप में
चाहे जैसे भी हमें उम्मीद नहीं छोड़ी चाहिए।


✍️लक्ष्मीनारायण।