साड़ी हमारे भारत का पारंपरिक परिधान रहा है। सदियों से तरह तरह के प्रयोग होते रहे इन साड़ियों में।

आज की स्त्रियां कितनी भी आधुनिक हो , जिन्होंने जींस टॉप को अपने पहनावे में शामिल किया हो ,परंतु उनके वार्डरोब में बहुत शान से साड़ियां मुस्कुराती हुई  अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज कराती दिखती हैं।

भारत का हर प्रांत अपने विशेष हस्तशिल्प के लिए जाना जाता है।

कुछ विशेष साड़ियां हैं ,,जिनमें भारत की  परंपराएं,कहानियां ,हस्तशिल्पियों द्वारा उकेरी गई हैं।


इन साड़ियों में प्रमुख हैं _कलमकारी, बालूचरी,मधुबनी, विवाहपट्टू,कांजीवरम।

_ कलमकारी _कलम से की गई कलाकारी ।प्राकृतिक रंगों से सजी इस कला को जन्म देने वाले गोलकुंडा और कोरामंडल के कलमकार थे।
कलमकारी का ज्यादा काम सिल्क और कॉटन पर किया जाता है।इन साड़ियों में भगवान कृष्ण,गणेश,विष्णु,राधाकृष्ण,देवी का चित्र पेंटिंग के माध्यम से उकेरा जाता है।

__ मधुबनी पेंटिंग
पहले बिहार के मुजफ्फरपुर,मधुबनी,और दरभंगा की महिलाएं दीवारों पर रामायण ,महाभारत,फूल पत्तियों को ब्रश की सहायता से बनाती थी,बाद में कैनवास ,और कुछ डिजाइनरों के प्रयास से यह कला साड़ियों पर भी उकेरी गई ।

_ बालूचरी साड़ियां
बंगाल के बिसुनपुर,और बालूचर के कलाकार इन साड़ियों के पल्लू में महाभारत और रामायण की कथाएं बनाते थे।पहले के समय में धनाढ्य घरों ,जमींदारों के घरों की महिलाएं,इन साड़ियों को शादियों ,त्योहारों में पहनती थी।इसमें जरी और उन्नत किस्म के रेशम का काम होता है।यह एक इको फ्रेंडली साड़ी है।

विवाह पट्टू साड़ी
 2008 में राजा रवि वर्मा की मशहूर पेंटिंग गैलेक्सी और म्यूजिशियन की थीम पर बनी चेन्नई सिल्क द्वारा बनाई गई  विवाहपट्टू  
साड़ी को  गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया था।

इस साड़ी का क्रेज भारत के मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी की पत्नी को 
इतना अधिक है ,इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है एक पारिवारिक कार्यक्रम में उन्होंने 40 लाख की विवाह पट्टू साड़ी पहनी जिसमे सोने,एमरल्ड,रूबी और भी कीमती धातुओं का काम किया गया था।

कांजीवरम साड़ियां

सोने चांदी के जरी के काम से बनी इस साड़ी का इतिहास बहुत पुराना है,कहते हैं इस साड़ी के बुनकर मार्कण्डेय ऋषि के वंशज थे।मार्कण्डेय ऋषि ,देवताओं के लिए कमल के रेशे से कपड़े बुना करते थे।उनकी परंपरा को यहां के बुनकर आज भी कांजीवरम साड़ियों के रूप में जीवित रखे हैं।कुछ नायिकाओं की तो  ये साड़ी ही पहचान है।

स्वरचित_संगीता सिंह