ए राही मत जाना भूल
काया बाग में बिखरे हैं
काम क्रोध मोहरूपी कांटे और शूल
याद रख तेरी भी एक दिन राख बन उड़ जाए रे धूल
याद रख तेरी भी एक दिन राख बन उड़ जाए रे धूल।।

सुन रे काया बाग के माली
सुख जाएगी तेरे तन की डाली
उजड़ेगा बाग ना होती रे यहां सदा हरियाली
अरे देख जरा 
ऊंचे महलों में उड़ रहे काग पड़े हैं खाली
बंद मुट्ठी आया इस जग में जाएगा हर हाथ खाली
बंद मुट्ठी आया इस जग में जाएगा हर हाथ खाली।।

सुन रे काया बाग के माली
ना कर कर्म ऐसे मिले तेरे जाने के बाद तूझे दुत्कार गाली
ना हंसे लोग ना दे ताली पर ताली
जब उड़ जाए हंस पिंजरा रह जाए तेरा खाली
जाने से पहले
आ बैठ प्रभु के चरणों में कर काया बाग की रखवाली
आ बैठ प्रभु के चरणों में कर काया बाग की रखवाली।।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏💐💐