मेरी पड़ोसन सत्ती के पास गाय है। मैं फलों और सब्जियों के छिलके , बची रोटी आदि उसे खिला देती हूं । एक दिन दूसरी पड़ोसन की अम्मा सत्ती के पास बैठी हुई थी ।

मैं आम के छिलके गाय को खिलाने गई , तो अम्मा कहने लगी  " गाय को जूठा मत खिलाओ गाय माता होती है ।" मैनें कहा  " अम्मा , सारी गाय ही माता होती है
ये गाय नहीं तो दूसरी गाय खाएगी हम तो बाहर डाल देंगे।
फिर ये ही गाय क्यों न खाएं ? इधर उधर फेंकने से तो अच्छा है तरीके से इसे ही खिला दिया जाए ।"

" कोई दूसरी गाय खा ले पर इसका दूध पीते हैं ।" अम्मा ने कहा ।


मैंने कहा "जब सत्ती घूमने के लिए गाय खोल देती है तब वो इधर उधर पड़ा हुआ कुछ भी खा लेती है , तब वो क्या जूठा नहीं होता "

फिर मैंने सत्ती से ही कहा , " तुम भी तो हमेशा ऐसे ही खिलाती हो और मुझे भी कभी मना नहीं किया अब बोलो ये छिलके गाय को खिला दूं या नहीं ?"

वह धीमे से बोली  "जब अम्मा कह रही है तो मत खिलाओ ।

मुझे बहुत अजीब लगा मैंने कहा "तुम बरसों से गाय पाल रही हो फिर अचानक कैसे बदल सकती हो , इस तरह खिलाने से कभी कुछ गलत हुआ ? क्या आगे इस तरह कभी नहीं खिलाओगी ।"
पर उससे कोई जवाब देते नहीं बना ।



                           ‌धनु दयाल