बड़ी मजे की बात हुई
इस बीते रविवार
बह रही थी गूगल मीट पे
काव्य नदी की धार
उस धारा के वेग में
बहने हम भी थे तैयार
पर हर दिन से ज्यादा व्यस्त है होता
एक गृहिणी का रविवार
जैसे तैसे भागते पहुँचे
हम काव्य नदी के किनारे
पर घर के काम न छोड़े पीछा
हम करें भी क्या बेचारे
काव्य श्रवण में ऐसे डूबे
शाम की चाय करी कुर्बान
पतिदेव भी घूर के देखे
लेकिन उन पर भी दिया न ध्यान
कानों में फँसाये हेडफोन
हम भी बैठे थे आसन पर
एक छोटी सी कविता पढ़ी
अपना नम्बर आने पर
काव्यपाठ से हो फुर्सत
हम घर के काम से हुए मुखातिब
घर में बरतन वाली बाई आ गयी
हम बेटी को देने लगे समझाइश
पर एक हो गई थी चूक
माइक ऑफ नही कर पाए
और गूगल मीट पे मेरी बातें
सुनकर सभी बहुत मुस्काए
वो तो भला हो मोबाइल का
जो चन्द मिनिट में हुआ डिस्चार्ज
वरना श्वेता ज़ूम ऑनलाइन की तरह
हमारा भी बन जाता मजाक
जब घर में सबको हमने बताई गलती की मिस्टेक
फेमिली में हम पे सभी हँसे पकड़ के अपना पेट
अब कहती प्रीति सयानी कि आगे से बहुत रखेंगी ध्यान
बार बार करेंगी चेक कही माइक न रह जाये ऑन
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✍️प्रीति ताम्रकार
जबलपुर

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