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सुनो नहीं है अब मुझे जरूरत चांद तारों की
ज़रूरत कहां है मुझे आसमां के सितारों की
तुम चले आना बस मेरे दिल के आंगन में
मेरे चांद बस तुम रहना मेरे दिल के गगन में।
आ जाओ कुछ पल तो बिता लें एक दूजे के पहलू में।
क्या पता कौन सा पल एक दूजे से अलग कर जाए।
कौन जाने कौन सा पल बन कर क़यामत आ जाए।
मिटा कर शिकवे गिले उतार देना सारी रंजिशों को
जब भी आना मेरे पहलू में ओढ़ कर मुस्कान ही आना।
ज़रूरत है हम एक दूजे की #अना सब उतार कर आना।
तनहाईयों मायूसियों से भला कब तक निभाओगे
बताना सच सच क्या तुम मुझे भूल कर रह पाओगे।
कैसे जी पाओगे खुशियों को किनारे करके।
क्या यूं ही तन्हा जीवन तुम गुज़ार पाओगे।
आना तुम मेरे पहलू में आना।
सारे शिकवे गिले भुला कर आना
तोड़ देना रिश्ता बेबसी और ग़म से वर्ना उम्र भर यूं ही पछताओगे।
चली जाऊंगी एक दिन तुम्हारी दुनियां को छोड़ कर
ढूंढोगे बहुत .......
पर सच कहती हूं मुझे कहीं नहीं पाओगे।
आ जाओ एक दूजे को ज़रूरत है एक दूजे की।
दस्तूर मुहब्बत का भला कैसे मिटाओगे।
मणि बेन द्विवेदी
वाराणसी उत्तर प्रदेश

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