मुझे याद है तुम्हारा पहली बार मुझको देखना
तुम्हारे साथ गुजारा हर-पल, हर-लम्हा मुझे आज तक अतीत की अविस्मरणीय यादों में हमेशा याद रहेगा और तुम्हारी यादें मृत्युशैया तक मेरे साथ बनी रहेगी हां....
तुम वही हो जो पहले थी...
बस वक्त के साथ-साथ तुम अब मेरी नहीं
पर में जानता हूं...
तुम्हें किसी एक की होना था ...
ओर हो गयी में भी अनचाहे रिश्तों की कसोटी में ढलता गया
स्कूल के सामान्य सी हंसी ठिठोली ओर तुम्हारी सहेलियों का वो मुस्कुराना कई बार साइकिल की चैन चढ़ाना
तुम्हारे नाम का जिक्र नहीं लूंगा...
अब चाहकर भी तुम से कोई उम्मीद नहीं रखूंगा
जो होना था वह हो गया अफसोस ....
बस अफसोस ही रहा।
तुम्हारी सोच तुम्हारे इरादे सार्थक प्रयास सब अच्छा लगता था...
हां मुझे सबकुछ याद है...
तुम मिली तो थी एक दिन जी भर कर बैठने की आरजू हुई पर
आज तुम से एक पल ही नजर मिलाता हूं न जाने क्यो...
अब वह वक्त ही नहीं
न वह समझदारी....
वह उत्साह बस समय के साथ-साथ धूमिल आईनों की छवि बदल कर ओझल होती जा रही है....
क्यों बेकार धड़क रहा मेरा दिल गैर के लिए
भावुकता, करुणा, जज्बात के अंधे युद्ध में जिसे जीतकर भी हमेशा हारता गया ।
प्यार का अनमोल उपहार बस खुदा ने कुछ ही पलों के लिए दिया था शायद ओर फिर वह तोहफा हां वही उपहार खुदा ने यादों की तिजौरी में तेरी छवि कैद कर
न खुलने वाला अतीत का ताला वक्त की चाबी न जाने कहां फेंक दी होगी....
हां मुझे तो याद है सब-कुछ
शायद तुम भूल गयी होगी।
✍️.... लक्ष्मीनारायण 🌱🍂🌱

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