दुनिया पूरी चालबाज है।
कदम कदम पर धोखा है।
काला बाज़ारी का गौरखधंधा।
जाने कितने को मिल भी नहीं रहा कांधा ।
क्या मिलेगा पाप करके।
सब यहीं धरा रह जाना है।
सबकी जिंदगी की जंग अभी जारी है ।
आज हमारी तो कल तुम्हारी भी बारी है।
मत बन तु इतना निष्ठुर।
मूल्यों को अपने भूल कर।
कर्तव्य पथ पर डट कर चल।
ज़िन्दगी ना भरोसा करती एक भी पल।

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