जो भा जाये वही
संगीत मन का,
जो दिल गुनगुनाये
वही गीत तरन्नुम का,
जो आत्मिक शांति दे जाये
वही योग जहाँ का,
जो आगे बढ़ने से रोके
वही रोग मस्तिष्क का,
जो अपने धन से हो
वही शौक वास्तविक सा,
जो खुद उठा सको
वही बोझ जीवन का,
निभा सको सबसे गर
यही मंत्र शिक्षा का,
बनाकर चल सको
वही मुकाम इच्छा का,
सफल होना न होना
है परिणाम मेहनत का,
कोशिश भी न करना
ये हारना है चित्त का,
निभाये चलो बस अपनों से
यही रास्ता है रीत का,
बनाये रहो मोहोब्बत सतत्
यही रिश्ता है प्रीत का,
जो भा जाये वही
संगीत मन का,
जो दिल गुनगुना जाये
वही गीत तरन्नुम का.....।
स्वरचित व मौलिक✍
सुमित सिंह पवार "पवार"
उत्तर प्रदेश पुलिस
आगरा

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