वो पहली वारिस आसमाँ से हो या दिल से हो
हमेशा याद रहती है।
भींग जाता है जब धरा और तन तो सौंधी सी खुशबू
छोड़ जाती है।।
झूम उठते है उपवन,खिल जाती है कली पुष्प बनकर
भ्रंमर गुंजारने लगते है।
मिल जाते है जब दिल से दिल तो हम बिन नींद के ख्वाब
देखने लगते है।।
मदमस्त भंवरा प्रसन्न हो झूम उठता है फूलों का आलिंगन कर।
और हम सात जन्मों तक एक दूजे के हो जाते है प्रेम में बंधकर।।
वो पहली वारिस में भींग कर मन इंडधनुष से सपने देखता है।
बन जाता है वो डर से बच्चा और जी भरकर नाचता है।।

0 टिप्पणियाँ