राखी मुरादाबाद  में रहती थी ।उसके तीन बेटियां थीं 
तीनों का स्वभाव अलग-अलग था ।बड़ी बेटी गंगा जो भी उस को मिलता है सब दूसरे को दे देती दानी प्रवृत्ति की, उस से छोटी गोपी बहुत चंचल प्रवृत्ति की थी। वह इधर-उधर उछल कूद करती रहती हर समय बोलना उसकी प्रवृत्ति तीसरी बेटी तीसरी बेटी सरला नाम के अनुसार सरल प्रवृत्ति की और छोटी-छोटी बातों पर रो पड़ती थी राखी को चिंता रहती है तीनों का स्वभाव अलग-अलग जरूरत से ज्यादा चंचल‌ अपना घर बार कैसे संहारेगी शादी की उम्र होती जा रही हैवह अपने पति से भी कहती है पति कहते हैं जैसे तुम्हारी मां ने तुम ही सिखा कर भेजा था वैसे ही तुम इन्हें समझा कर भेजना सब ठीक हो जाएगा तुम तो नहाक परेशान होती वह भी सोचती कि मैं कौन सा इनके साथ उम्र भर रहने वाले हैं खुद ही अपने घर को संभाल लेगीं।एक दिन गोपी उछलखुद करती हुंईआई और बोली मां मुझे नया सूट और उसके साथ का पहनने का सामान दिलाओ ना मुझे अपनी सहेली की शादी में जाना है गोपी बेटा हर समय उछल कूद नहीं करते कभी शांति से भी बात करते हैं गोपी बोली अगर सब शांति से बात करेंगे तो सरला क्या करेंगी उसके लिए सरला है ।ना मां बोली बेटा अभी पिछले महीने ही तो तुम्हें नया सूट दिलाया था वह पहन‌‌ जाओ मां वह तो ‌में पहन चुकी इतने में गंगा आती है कहती है तुम मेरा सूट पहन लो मैंने नहीं पहना है और उसके साथ की ज्वेलरी और चप्पल भी ले लो गोपी खुश हो गई खुशी से गंगा के गले लगते हैं गोली थैंक्यू गंगा और अपने कमरे में चली गई मां बोली गंगा कब तक अपनी चीजें यूं ही बांटती रहोगी मां कोई बात नहीं गंगा बोली देखो गोपी खुश हो गई ना इतने में सरला रोने लगी मां बोली अब तुझको क्या हुआ तू क्यों रोने लगी मुझे गंगा दीदी का प्यार देखकर रोना वह तो बात बात पर रोती है राखी ने समझाया बेटा ऐसे नहीं रोते और अपने काम में लग गई थोड़े दिन बाद उसके पति बोलो लड़कियां बड़ी हो रही है उनकी शादी की तैयारी करते हैं और उन्होंने तीनों के लिए लड़की ढूंढ शादी का दिन निश्चित कर तीनों की शादी एक ही दिन करने का फैसला किया शादी का दिन भी आ गया तीनों लड़कियां तैयार हो गई मां मां कैसी लग रही हैं अच्छी लग रही हो मेरी बेटी अरे यह क्या तूने इतनी पसंद से हार लिया था वह कहां है मां मैंने सरला को दे दिया उसको बहुत पसंद आ रहा था अरे बेटा आज के दिन तो रहने देती आज तुम लोगों की शादी है गोपी से बोली वह भी तुम उछल कूद मत करना ज्यादा शांति से बैठे रहना थोड़ा शर्माना आज तुम्हारी शादी है वह बोली मां कैसी बातें करती हो मेरी शादी में नहीं नाचूंगी  तो कौन नाचेगा और हंस देती है ।इतने में सरला रोने लगती है अब तुम क्यों रो रही हो मां मुझे सब कुछ छोड़ कर जाना पड़ेगा मुझे सब की बहुत याद आएगी मैं कैसे रह पाऊंगा अभी तो बेटा बहुत देर है अब से रहोगी तो तुम्हारा मेकअप खराब हो जाएगा चुप हो जाओ तीनों की शादी है धूमधाम से अच्छी तरह निबट जाती है तीनों अपने अपने घर चली जाती है राखी अपने पति से कहती है मैं तो शादी की तैयारियों में लड़कियों को समझाना ही अब पता नहीं क्या होगा आखिरकार जिसका डर था वही हुआ।वहां पर गंगा अपनी हर चीज जो भी कोई उससे मांगता उसको दे देती सास नंद को उसकी आदत का पता लग गया था ,और मैं उसका खूब फायदा उठाती थी ।जो भी उसका पति गणेश पैसे देकर जाता वे उस से ले लेती थी नंद सास किसी ना किसी बहाने से बहुवा में यह सामान लाना है भाभी मुझे बाजार जाना है गंगा से पैसे मांग लेती गंगा ने ना करना नहीं सीखा था वह पैसे उनको दे देती
 और उसको गणेश कहता रोज तुम्हें पैसे देकर जाता हूं इतने पैसों का क्या करती हो गंगा तुम बहुत खर्चा कर रही हो पर वह कुछ नहीं बोलती चुप रहती है उधर गोपी चंचल स्वभाव के कारण अपने पति रमेश के सब दोस्तों से बात करती और हंसी मजाक करने लगती है  रमेश को और उसके परिवार वालों को अच्छा नहीं लगता रमेश उसे समझा था कि तुम्हारी शादी हो गई है और मुझे अच्छा नहीं लगता कि तुम हर एक से हंसी मजाक करो पर वह नहीं समझती 
 उधर सरला जरा सा कोई उसे जोर से बोल देता तो रोने लगती उसका पति साहिल उसकी इस आदत से परेशान था और उसकी सास भी। जिस बात का राखी को डर था वही हुआ एक दिन तीनों रोती हुई अपनी मां के पास आई
तीनों ने अपनी अपनी परेशानी बताइए मां बोली मैं तुम्हें 3 सीख देती हूं इन्हें अपने जीवन में उतार कर रखना कभी किसी को मना करना सीखो। दूसरी हर एक से बातें करना बंद करो चुप रहना सीखो बिना किसी कारण के हंसना खिलाना अच्छा नहीं होता
तीसरी बात हर बात पर रोना बंद करो रोने से तुम्हें लोग कमजोर समझते हैं और तुम्हारी बात का कोई वजन नहीं रहती कोई तुम्हारी फिर कदर नहीं करता तीनों इन सीखों को सीखकर अपनी ससुराल आ गई अब गंगा अपनी हर चीज नहीं देती थी उसका कोई फायदा नहीं उठा पाता पाता था अब उसने मना करना सीख लिया था उसका पति गणेश बोला अरे इस महीने तो तुमने काफी बचत कर ली है मैं तुमसे बहुत खुश हूं चलो कहीं बाहर घूमने चलते हैंऔर उधर गोपी का पति से बोला तुम तो अब काफी समझदार हो गई हो मैं बहुत खुश हूं तुम मेरे दोस्तों से बेवजह बातें नहीं करती हो और घर का काम भी खूब मन लगाकर करती हो यह लो यह तुम मैं तुम्हारे लिए एक सुंदर सा सेट लाया हूं जो तुम पर बहुत सुंदर लगेगा गोपी खुश हो जाती है और अपने पति के गले लग जाती है उधर सरला ने भी अब बात बात में रोना बंद कर दिया था अगर उसको रोना आता तो वह अलग जाकर रो लेती अब उसका पति साहिल भी उससे बहुत खुश था और उसकी सास क्योंकि काम में तो पहले से ही होशियार थी उसको अब सब का भरपूर प्यार मिलने लगा और तीनों का जीवन सुखी हो गया एक मां की दी हुई सीखने तीनों का जीवन बदल दिया तो इस कहानी से हमें सबक मिलता है कि ना तो अपनी चीजें जरूरत से ज्यादा बांटने चाहिए और ना ही हर समय किसी से हंसी मजाक करना चाहिए हर एक चीज की सीमा होती है ।
न‌ही हर समय दुखी होना चाहिए अपने आप को परिस्थिति के हिसाब से बदल लेना चाहिए
 यह मेरी रचना स्वरचित है और काल्पनिक है


                        दिल की कलम से 
                        मधु अरोड़ा