लक्ष्मी आज कितनो महीने बाद अपने आधे सुखे ,आधे लहलहाते खेतो को देख रही थी अपनी धुंधली आखों से वो सब कूछ साफ़ देख रही थी ।
उसके मास्टर ने कितनी मेहनत से इन फसलों की सेवा की थी,पर अब तो सब मुरझा रही है,उसका पति मास्टर था पर अब दोनो मे से उसके मास्टर को भगवान ने बुला लिया था ।
.............. पेंशन से ही घर चलता था ,लक्ष्मी को उस पेंशन मे से कूछ भी नहीं मिलता ।
खाने मे कभी भी उसे सब्जी नही मिलती थी,फिर भी वो अपने बेटे व बहू से कभी कूछ नही बोलती ।
रवि बोला ये ले माँ तेरा खाना रख दिया मै जा रहा हू ।रवि उसका बेटा है,वो अपनी माँ को खेत मे बनी मड़ई पर छोड़ कर चला गया ।वो बेबसी से देखते रही।
..........वो अन्दर गई तो एक गूदड़ी थी जो की काफी खराब थी ,फिर भी उसने उस गूदड़ी को नीचे बिछाया और उस पर लेटने लगी तो उसे उसके पति की खुरपी दिखी तो वो उसे ले के बाहर आ गाई ,और घासो को साफ करने लगी।पर धुप तेज होने के कारण वो कर नही पाई ।
पूरा दिन चला गया,रात होने लगी पर रवि नहीं आया ,उसके खेतो मे काम करने वाला गोपी खाना ले के आया ,तू ही आया जी रवि मालिक ने बोला की माँ को खाना दे के आजा ,लक्ष्मी ने कूछ नही बोला ।
उसने रोटि खाई और सो गई ।
अगली सुबह फिर गोपी खाना ले के आया वो समझ गई की अब रवि नही आयेगा उसने मुझे यही ला के छोड़ दीया की खेतो की रखवाली करू,उसने ऊपर देखा और रोने लगी ।
कूछ दिन चले गए।
......... एक दीन बहुत ही बारिश हुई लक्ष्मी को बैठने की जगह नही थी सब तरफ पानी और कीचड़ ही था उसकी गूदड़ी भी भीग गई थी,पूरी रात उसने एक कोने मे बैठ कर बिताई ,जिसकी वजह से उसको बुखार आ गया था फिर भी उसका बेटा उसे देखने या लेने नहीं आया,गोपी के हाथो दवाई भेज दी ।
लक्ष्मी को बहुत ही दुख हुआ पर वो कर भी क्या सकती है उसका बूढ़ा शरीर उसका साथ नहीं दे रहा था वो लाचार थी।
गोपी ने बोला माई आज मालिक आएगे तुझे लेने और खाना भी तू घर पे ही खायेगी ,लक्ष्मी ने पूछा आज तारिक़ कौन सी है, ####
आज 1तरीक है गोपी ने बोला 
तभी रवि आ गया बोला माँ चल वो चल दी अपने बेटे के साथ पर वो खुश थी उसको अपने मास्टर की एक  बात याद आई जब उसकी तबीयत खराब थी तो वो बोलता था की मेरे जाने के बाद तू अपनी पेंशन को गाठ बांध कर रखना तभी तेरी सेवा होगी,वरना कोई नही करेगा।
वो बैंक मे घुसी उसके बेटे ने उससे अगुठा लगवाया ,जब पैसे लेने के लिये उसका नाम लिया गया तो वो खड़ी हो गई ,और अपनी पेंशन ले ली ,उसे देखा उसने पति के जाने के बाद आज 4साल के बाद वो इतने पैसे देख रही है ,वो बेटे को ही बोलती थी की तू रख ले देखती भी नही थी की कितना है।
उसने उस पेंशन को अपने आंचल मे रख के गाठ लगा दी ।
और उसके चेहरे पर एक तीखी सी मुस्कान थी ,और उसका बेटा ये सब देख के हेरान था ।की माँ को ये क्या हो गया ।
जब बेटा बदल सकता है तो माँ  तो गाठ लगाएगी ना ।