देश के चोराहों पर आज भी वही मंजर है।।
गरीब के बच्चे ने छोड़ दिया भीख का प्याला हाथों में आज उसके खंजर है।
ना दोष दो निर्दोष बच्चों को
लाचारी कमजोरी  लानत में उसके दिल में उठा बवंडर है
कहीं ना कहीं हम भी इसमें शामिल हैं
देश के चौराहों पर बर्बादी का यह जो मंजर है।।
देश के चौराहों पर बर्बादी का यह जो मंजर है।।
ग़रीबी का मारा बच्चा कब तक सहता समाज के ठेकेदारों की मार
भीख मांगते थक गया था रईसों के समक्ष हाथ फैलाकर गया वो हार।।
नादान कुछ समझ ना सका
अपराध की वह डगर चला।।


जमाना भी कितना अजीब है ना
खुद बदलकर रूख हवाओं का 
कहते हैं अक्सर लोग आज मौसम है बड़ा बदला बदला 
कहते हैं अक्सर लोग आज मौसम है बड़ा बदला बदला ।।


पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏💐💐