मुझे चेहरे सुंदर आकर्षित नहीं करते
लेकिन सुंदरता आकर्षित करती है
मैंने सभी माॅं के सुंदरता को देखा है
सोचा भी है और महसूस भी किया है
मैंने उन सभी के गुणों निस्वार्थ
भावना के आधार पर उनकी
सुंदरता का मुल्यांकन किया हैं ।
उनके मन में असीम प्यार हैं
कुमुदिनी सी कोमल ह्रदय हैं
अपने दुखों को आंचल में समेटती हैं
अपने शरीर की सुंदरता त्याग कर
अपने बच्चों की परवरिश करती हैं
बच्चों की खुशी की खातिर
हर दुख - दर्द सहती हैं
पहाड़ों जैसे सदमें झेलती है उम्र भर
फिर भी नहीं टूटती नहीं झुकती है ।
इक औलाद की तरफ से दी जाने वाली
तकलीफ़ से माॅं टूट जाती झुक जाती है
फिर भी अपना दुख - दर्द भूलकर
अपनी औलाद के दुख में शरीक हो जाती हैं।
ये सब देखती हूॅं मैं
और यह सवाल करती हूॅं मैं
तू इतनी दयालु इतनी धैर्यवान
तू इतनी सुंदर कैसे हैं माॅं ???
धन्यवाद 🙏🙏
" गुॅंजन कमल " 💗💞💓

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