माँ एक छोटा सा नाम ।
जिसमें समाया है सारा जहाँ।
जहां भर की खुशियाँ ।
अपनो बच्चों पर वार देती है ।
उन्हे रच इस पृथ्वी पर
आकार देती है ।
सदगुणों से भरपूर माँ ।
संस्कृति की परिभाषा ।
बच्चों को समझाती है।
हृदय वेदना से भरी ।
हमेशा खुशियां लुटाती है।
उसका निष्पक्ष प्रेम सारी दुनिया से।
लड़ने की ताकत देता है।
आँखों में बच्चों की सूरत समाकर।
वह हमेशा जीती है।
भविष्य के लिए करें चिंता।
धर्म पालन करती है।
प्यार की मूरत कहे या।
दर्द का सैलाब सहने वाली।
दोनों रूप है इसके।
नदियों सी शांत ये बहने वाली।
दुर्लभ जीवन एक माँ है।
इसके जैसा ना कोई।
मनुष्य की माँ हो या पशुओं की।
पहचान एक ही है सब माँ की।
जब तक हो कोशिश करती ।
रक्षा करती अपने बच्चे की।
दूर गगन में फिर छोड़ देती।
दुनिया को समझने को।
नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया)🌹🌹

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