रहस्यमई कीबोर्ड का Enter क्लिक
Direct रहस्यमई दुनिया में पहुंच गए
आंखें खुली की खुली रह गई हम बेहोश हो गए
बेहोशी हटी हसीन वादियों के नजारों में खो गए
चारों तरफ घने पेड़ों की हरियाली थी
पक्षियों का था मधुर कलरव गान
शेर का स्वभाव था बिल्कुल शांत
इंसान का नहीं था नामोनिशान
इंद्रधनुषी रंग सदैव आसमान पर बिखरता था
आसमां भी वहां झुकता था
अपनी चहेती धरती से आकर मिलता था
नहीं होती थी वहां अमावस की रात
पूर्णिमा का चांद होंठों को छूकर गुजरता था
सुरज के थे शीतल नैन नहीं कभी वह तपता था
विशाल पर्वत पर्वतों से उल्टी बहती नदियां थी
दुध से झरने कल कल बह रहे थे
मानो मुझसे ही कुछ कह रहे थे
बहते रहना निरंतर तुम धारा कभी ना टूटने देना
लिखते रहना निरंतर कलम कभी ना रूकने देना
इंसान से जाकर बस इतना कहना
जान पर खेलकर प्रकृति की सदैव रक्षा कर
मत उजाड़ आने वाली नस्लों का घर आबाद कर
तदूपरांत
ना जाने किसने रहस्यमई कीबोर्ड का Exit दबाया
आंखें खुली तो पलंग पर स्वयं को पाया।।
प्रकृति का संदेश हर नारी हर पुरुष तक पहुंचाया।।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏 💐💐

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