चेहरा छुपाए बैठे हो यूँ, बालों में 
    छुप गया हो चांद,जैसे बादलों में 
    
    बीच   भंवर  में  डूब  रहा हूं   मैं
    पड गए  हैं  डिंपल  तेरे ,गालों में 

    कैद हो  गई  है खुशबू , बालों  में
    लगा लिया है तूने गजरा, बालों में

    आप याद आते रहे,हमें,मुसलसल 
     खबर भी नहीं ली हमारी, सालों में

    उगते सूरज की लालिमा तो देखो
    आपने लगाया है,मस्करा गालों में

    कर  लूं ? आपसे  इजहार ए  मुहब्बत 
    या छुपा लूं “राज़” दिल के तालों में


    भूपेन्द्र चौहान “राज”