माँ तेरी बहुत याद आती हैं ।


माँ तेरी बहुत याद आती हैं,
काश मेरा रब मुझपे मेहरबाँ होता
तो तू आज साथ होती,
सही कहते हैं लोग माँ नहीं होती तो हम नही होते,
माँ  तेरी बहुत याद आती हैं ।

माँ के आगे तो भगवान् भी नहीं,
माँ है तो मन्दिर की जरूरत नहीं होती,
मोह से बड़ी कोई जंजीर नही होती,
जिगर से बड़ी कोई पीर नहीं होती,
माँ तेरी बहुत याद आती हैं ।

तू मेरे हर दर्द को भांप लेती,
कभी तूने डांट भी लगाई तो तू ही छुप के रो लेती,
अब तो हमेशा ही दिल मे एक टीस सी उठती है,
आँखो से बरबस ही बाढ सी आती है,
माँ तेरी बहुत याद आती हैं ।

काश! तूने अपने जिस्म से अलग न किया होता तो,
माँ मेरी पेहली और आखरी सांस भी तेरे साथ होती,
काश तू होती,
माँ तेरी बहुत याद आती हैं 🤱।