हर मुल्क में अपराधियों को भिन्न भिन्न प्रकार से सजा दी जाती। जितना बड़ा अपराध उतनी बड़ी सजा। इंसानों को नज़ाने कितने प्रकार की सजा सुनाई जाती है। काला पानी की सजा, उम्रकेद, फांसी और भी नाज़ाने कितने प्रकार की सजाये। लेकिन क्या कभी सुना है कि एक हाथी को फांसी की सजा सुनाई गई हो।
सुनने में थोड़ा अटपटा है लेकिन सच है। आज से लगभग 105 साल पहले अमेरिका में एक मैरी नाम के हाथी को फांसी कि सजा सुनाई गई थी। उस वक्त जानवरो को फांसी पर चढ़ाना एक आम बात थी। मैरी को फांसी पर चढ़ाने का कारण भी बहुत अजीब था। उस बेजान जानवर की जान लेने के लिए उस वक्त दो हज़ार से भी ज्यादा लोग उतारू थे। तो चलिए अब जानते है कि ऐसा क्या हुआ जो मैरी को फांसी की सजा सुनाई गई? ऐसा क्या हुआ जो उमड़ी भीड़ में से किसी का भी दिल उस बेजान जानवर को तड़पता देखकर नहीं पसीजा? 


अमेरिका में स्पार्कस वर्ल्ड फेमस शो था जो की चार्ली स्पार्कस नाम का एक व्यक्ति चलता था। उसमे कई प्रकार के शो होते थे। कई सारे जानवर वहाँ मौजूद थे जिनमे से एक था मैरी। मैरी को अपने ट्रेनर से बहुत लगाव था। ख़ासकर मैरी का ही शो देखने के लिए लोग दूर दूर से वहाँ आते थे। लेकिन एक दिन मैरी के ट्रेनर की सर्कस के मैनेजर से कुछ झड़प हो गई जिसके चलते उन्हें सरकस छोड़ना पड़ा। जिसके कारण मैरी के लिए एक नया ट्रेनर लाया गया। अपने पुराने ट्रेनर से गहरा लगाव होने के कारण मैरी अपने नए ट्रैनर से ज्यादा घुलमिल नही पायी। इस बीच शोज तो अच्छे से होते थे लेकिन मैरी काफ़ी उदास रहने लगी।  एक दिन सर्कस के प्रमोशन के लिए शहर में परेड का आयोजन किया गया, जिसमें मैरी समेत सभी जानवर और सर्कस के सभी कलाकार शामिल हुए. इस दौरान शहर के बीचों-बीच परेड निकाली गई. इस दौरान रास्ते में मैरी को कुछ खाने की चीज दिखी, जिसके लिए वह तेजी से आगे बढ़ने लगा.
उसके बाद नए महावत ने मैरी को रोकने की काफी कोशिश की, लेकिन वह नहीं रूका. इस दौरान महावत ने उसके कान के पीछे भाला मारा, जिससे हाथी तिलमिला उठा और गुस्से में उसे नीचे पटक दिया. उसके बाद मैरी ने उसके ऊपर अपना पैर रख दिया, जिससे महावत की मौत हो गई. यह घटना देख कर लोग इधर-उधर भागने लगे. वहीं कुछ लोगों ने हाथी को मार डालने के नारे लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया. हालांकि उस समय तो यह मामला शांत हो गया, लेकिन अगले दिन के अखबारों में इस घटना को प्रमुखता से छापा गया, जिसके बाद घटना पूरे शहर में तेजी से फैल गई.
शहर के लोग सर्कस के मालिक चार्ली स्पार्क से हाथी मैरी को मृत्युदंड देने की मांग करने लगे. साथ ही उन्होंने धमकी भी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो शहर में फिर कभी सर्कस नहीं होने देंगे. कई लोगों ने कई तरह से हाथी को मारने की बात कही. किसी ने ट्रेन से कुचलवा कर मारने को कहा तो किसी ने हाथी को करंट देकर मारने की बात कही. आखिर में लोगों की जिद के आगे चार्ली स्पार्क को झुकना पड़ा और उन्होंने मैरी को मृत्युदंड देने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने 100 टन का वजन उठाने वाली एक क्रेन मंगवाई और 13 सितंबर 1916 को क्रेन की मदद से हाथी को हजारों लोगों के बीच क्रेन से उठाया गया लेकिन एक अच्छी खासी ऊंचाई से मैरी नीचे आ गिरी जिसकी वजह से उसकी गर्दन में एक गहरी चोट आयी तो हर तरफ खून फ़ैल गया। ये देखकर भी वहाँ उमड़ी भीड़ में से किसी का दिल नहीं पसीजा और एक बार फिर मैरी को क्रेन की मदद से ऊपर उठाया और फांसी पर लटका दिया। काफ़ी देर तड़पने के बाद उसके जान निकाल गई और वो हमेशा के लिए एक गहरी नींद सो गई।
उस दिन मौत मैरी की नहीं बल्कि इंसानियत की हुईं थी।
महावीर जी ने कहा है " एक जीवित प्राणी के प्रति दया रखो … घृणा से विनाश होता है।"
सभी व्यक्तियों को सजा से डर लगता है, सभी मौत से डरते हैं| बाकी लोगों को भी अपने जैसा ही समझिए, खुद किसी जीव को ना मारें और दूसरों को भी ऐसा करने से मना करें|



*************************************