ऐसा नही की तुम न मिलो तो मर जाएंगे हम,
पर यह भी एक सच है बिछड़े तो हम न जी पाएंगे।
हम ही न होंगे तेरे प्यार में बाबरे ओ साजन,
जब कभी तन्हां होंगे तुम्हे भी बहुत याद हम आएंगे।
कभी तन्हाइयों में तरन्नुम बनके,
तेरे होठो पर थिरक हम जाएंगे ।
कभी महफिलों में बनके अश्क,
आँखों से छलक हम जाएंगे ।
जब कभी होंगी तपती दोपहरी,
बनके पुरुवाईयाँ तेरे दामन से हम लग जाएंगे ।
यह तो नही कहते हर पल तेरे जहन में रहेंगे,
पर इतना दावा है तुम्हें अक्सर याद आएंगे हम।
जब कभी बड़ जाएगी सर्दियों की ठिठुरन,
बनके जज्बातों की तपिश तेरे जज्बों से,लग जाएंगे हम।
तुम हो सके तो भूल जाना यह सारे पल,
मत सोचो हमारा की तुम्हें किस तरह हम भुलाएंगे।
जिन रास्तों पर कभी मिले हम,
जब गुजरेंगे उन राहों से बाबरे हो हम जाएंगे।
अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।

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