धीरज धर बंदे,धीरज धर,
दुख के बाद आता सुख है,
कह गये संत ज्ञानी,
धीरज धर बंदे....
करता था,समय नहीं समय नहीं,
अब परिवार के, साथ रह कर,
कुछ गपशप कर ले,
धीरज धर बंदे....
करता था समय नहीं,समय नहीं,
अब बच्चों के संग, बच्चा बन कर,
कुछ बचपन को जी ले,
धीरज धर बंदे....
करता था समय नहीं, समय नहीं,
अब घर में साथ, सबके मिल कर,
कुछ काम धाम कर ले,
धीरज धर बंदे....
करता था समय नहीं,समय नहीं,
अब कलाकारी, अपनी दिखा कर,
कुछ शौक पूरे कर ले,
धीरज धर बंदे....
करता था समय नहीं, समय नहीं,
अब नाते रिश्तेदारी में,फोन कर,
सम्बंध प्रगाढ़ कर ले,
धीरज धर बंदे....
करता था समय नहीं, समय नहीं,
अब कसरत व्यायाम, अपना कर,
खुद को स्वस्थ कर ले,
धीरज धर बंदे....
करता था समय नहीं, समय नहीं,
अब अंतर्मन को, निराश न कर,
खुद को संयत कर ले,
धीरज धर बंदे....
करता था समय नहीं, समय नहीं,
अब अपना ओर, अपनों का,
कुछ ध्यान तू रख ले,
धीरज धर बंदे....
करता था समय नहीं, समय नहीं,
बिता दे ये समय,हिलमिल कर,
अपनों के संग रह ले,
धीरज धर बंदे....
करता था समय नहीं, समय नहीं,
सबके मन से, दहशत को भगा कर,
कुछ हरि नाम जप ले,
धीरज धर बंदे....
करता था समय नहीं, समय नहीं,
अब प्रभु भक्ति में, मन लगा कर,
कुछ ईश से दुआ कर ले,
धीरज धर बंदे....
धीरज धर बंदे, धीरज धर,
दुख के बाद,आता सुख है,
कह गये संत ज्ञानी,
धीरज धर बंदे....।
काव्य रचना-रजनी कटारे
जबलपुर ( म.प्र.)

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