आज इंसान अपनी कीमत
घटा रहा,
इस कोरोना काल में भी
पैसे कमा रहा,
शर्म नही इंसान को
इस मुश्किल दौर में भी
पैसे कमाने की सोच रहा,
जहां एक और इंसान मर रहा,
और दूसरी और इंसान अपनी जेबें
भर रहा।
तुम अपना दिमाग भूखे भेड़िए
की तरह न चलाओ,
कुछ तो इंसान पर रहम खाओ,
इंसान की कीमत को यूं न घटाओ,
ये वक्त कमाने का नही जान बचाने का है,
इसे यूं न गंवाओ।
हरप्रीत कौर

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