नटवर- नागर कृष्ण, रुप था विराट,
जाकर राधा- रानी ने, उसको समेटा,
किया राधा ने अपना, रुप विस्तार,
हृदय बन गया उसका, सारा ब्रज,
बूझत हैं श्याम, तू कौन की गौरी,
राधा के प्रेम की, थाह न पाया कोई,
आते ही कुरूक्षेत्र, बदला समस्त परिवेश,
रुक्मिणी ने दिया, राधा को पीने, दूध गर्म,
जलन थी, उसकी बहुत, दूध में विद्यमान,
स्मरण कर कृष्ण का, पी गयी इक सांस,
पिया दूध राधा ने, छाले पड़े कृष्ण के पाँव,
पड़े फफोले ऐसे, गर्म तेल में जले हों जैसे,
पूछती रुक्मिणी देख, छाले पड़ गये कैसे,
कृष्ण कहते, है प्रिय, राधा बसी, हिय मेरे,
नाम कृष्ण का लेकर, पी गयी दूध चुपचाप,
जलन जो तुमने दी थी, वो फूटी मेरे तन से,
तत्वन के तत्व, बन गये ,जग जीवन कृष्ण,
कृष्ण को हूँ तत्व मैं,वो वृषभान की किशोरी ।
काव्य रचना -रजनी कटारे
जबलपुर ( म.प्र.)

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