वैशाखी पूनम को चन्दो
भरगयो मारे दिल में बन्दों
राती राती रोशनी देकर
करतो मारो काम यो हैकर
रुक रुक ने यो आगे बढतो
तारा के बीच दिखे ना घठतो लागे जैसे आग को फंदों
करतो नित रोज यो धंधों
बुद्ध पूनम को आयो चन्दो जगमे नाम कमायो चन्दो
वैशाखी पूनम को चन्दो
संध्या पंवार