अस्पताल में प्रवेश करते ही निलेश ने अमृता को बाएँ तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि तुम वहा बैठो
और खुद रिसेप्शन की तरफ बढ़ गया।
.............अमृता सोच रही थी की ये अस्पताल कम और कसाई घर लग रहा है ।
मै भी तो कसाई ही हू जो को अपने ही खुन को सब कुछ जानते हुए भी मारने आई हू। ----------मेरे बगल मे एक देहाती महिला बैठी थी,जिसके साथ उसकी दो बेटियाँ भी थीं ।
"बीबीजी आप भी जांच के वास्ते आई हो "क्या!
हम्म्म..................अमृता ने अनमने मन से बोला ।
तभी रज्जो का नाम लेती हुई नर्स आई चलो तुम्हारा नंबर है,और वो अन्दर चली गई ।
अमृता फिर सोचने लगी ................परुष की मानसिकता और स्त्री की नियत कभी नहीं बदलती,फिर चाहे वो पढी लिखी हो या अनपढ़ ।
क्या लड़का ही वारिस हो सकता हैं,लड़की नही!
तभी अस्पताल के शोरगुल से अमृता का ध्यान टुटा,
देखा की वह रज्जो सब नर्स को धक्का देते हुए कमरे से बाहर निकली और अपने पति का गिरेबा पकड़ते हुए बोली तू तो बोला था बच्चे को दिखाना है की उसे कोई बीमारी तो नही है पर डॉक्टरनी तो बोले है की जाँच से पता चल जाएगा की छोरा है कि छोरी ,.............छोरी हुई तो........
तब उसका पति बोला कि तू छोरियां पे छोरीया जनेगी और मै तेरे साथ उन सब का पेट पालता रहू,वारिस होवे की ना।#####रज्जो ने अपनी छोरीया का हाथ पकड़ा और अपने पति को बोली तू वारिस ला ले मै अपनी छोरियो का और अपना भी पेट पाल लुगी।
मेरी बेज्न्मी औलाद पे नजर रखी तो तुझे काट के धर दूगी, बोल के अस्पताल से बाहर निकल गई ।
माहौल शांत होने पर अमृता को अपना नांम सुनाई दिया
नर्स के आते ही वो उठी और निलेश के पास जाकर बोली की मै भी अपनी अज्न्मी बच्ची को नही मार सकती।
उम्मिद है कि तुम्हे तुम्हारे सारे सवालों के जवाब मिल गये होगे कहकर वो भी अस्पताल के बाहर जाते जाते रकी और उस बोर्ड को गिरा दी जिस पर लिखा हुआ था ............................भ्रूण का लिंग परिक्षण कराना कानून अपराध है।
बाहर आकर उसने टैक्सी ली और बोला पूलिस स्टेशन चलो ।
गावों मे आज भी फ़र्क होता है।

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