खोजी मन
रे बावरे
काहे भटके वन - वन
जिसे तू ढूंढ रहा
मिले तेरे अंतर्मन ।
खोजी मन
रे बावरे
क्यों डर पे पल - पल
जिससे तू डर रहा
वह तेरे अंतर्मन ।
खोजी मन
रे बावरे
कब आए पनघट
वह निर्झर बह रहा
तेरे ही अंतर्मन
खोजी मन
रे बावरे
जिसकी है चाहत
रुक, ठहर, थम
बैठा तेरे अंतर्मन ।

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