बिटु एक गरीब परिवार से था उसके माता-पिता जैसे तैसे अपना जीवन यापन कर रहे थे। मजदूरी कर के अपना परिवार का भरण-पोषण करते थे।उनकी मजदुरी से जो कुछ भी मिलता था, वो उससे किसी तरह दो वक़्त के भोजन का इंतजाम कर पाते थे, जैसे तैसे जिंदगी कट रही थी मगर विधात को कुछ और ही मंजूर था, यकायक उनकी मौत हो गई। जिससे उनके जीवन में दुखों का पहाड़ टुट पङा उस वक्त बिटु महज दस वर्ष का था, वो ये समझ नहीं पा रहा था कि क्या होगया है, वक़्त बीतता गया पर वह अपने पिता के यादों से बाहर नहीं निकल पा रहा था, क्युकी की उसकी उम्र भी छोटी थी मां ने अपने दिल पर पत्थर रख कर अपने बेटे के भरण-पोषण करने में लग गई। वह दिन भर पत्थर तोड़ती और शाम को जो पैसे मिलते उन्ही से अपने बेटे का पेट भरती, धीरे-धीरे समय बीतता गया और बिटु भी अपने पिता के ग़म से उबर रहा था कि उसका भाग्य फिर उससे रूठ गया, उसकी मां की तबीयत बिगड़ी ने लगी और उसकी अवस्था भी बढ़ गई थी। वो परेशान रहने लगी की उसके बाद बिटु का क्या होगा, उसने बिटु को अपने पास बुलाया और उसके सिर पर अपना हाथ फेरते हुए कहा कि बेटा मेरे मरने के बाद तुम अपना ख्याल रखना, बिटु चुपचाप अपने मां को देखते हुए कहा कि मां तुम ठीक हो जाओगी। तुम आराम करो मैं काम करने जाउंगा। और बिटु अगले दिन सुबह उठकर उसी जगह गया जहां उसकी मां पत्थर तोड़ती थी उसने अपने मालिक से कहा कि साहब मेरी मां की तबीयत खराब हो गई है इस लिए मैं आया हूं फिर वह अपने  छोटे-छोटे हाथों से पत्थर तोड़ने लगा शाम को जो पैसे मिलते उससे वह अपनी मां के लिए भोजन और दवा ले कर घर जाता है एक दिन उसकी मां भी मर जाती है और वह बिल्कुल अकेला हो जाता है वह अपनी मां को पकड़ कर रोने लगता है। वह सोचता है कि अब कैसे इस दुनिया में अकेला रहेगा, बिटु का अब कोई नहीं था, जिसको वह अपना कह सके। दोपहर का समय था उसे बहुत तेज से भुख लगी पर उसके घर में कुछ भी नहीं था खाने के लिए वह भुख के मारे तड़प रहा था। दोपहर से रात हो गई मगर वह भुखे पेट रोते-रोते सो गया सुबह उठकर वह भोजन के लिए पत्थर तोड़ने चला गया।मगर भुख लगने के कारण वह काम नहीं कर पा रहा था। उसने देखा कि किसी ने वही सुखी रोटी फेंकी है।बिपुल को रहा नहीं गया और उसने रोटी उठाकर खाने। उसका मालिक सब देख रहा था उसने बिटु को बुलाया और पूछा कि तुम ये सुखी रोटी क्यूं खा रहे हो उसने बोला साहब मैं कई दिनों से कुछ नहीं खाया है। मालिक को उसपे दया आई और उसके आंखों से आंसु बहनें लगे। उस ने बिटु को ले जा कर दुकान पर बैठकर पेट भरकर ख़ान खिलाया। मालिक ने सोचा कि। हे। भगवान इस नादान बच्चे को कितना दुख है। मालिक ने उसे अपने घर में रख लिया।।


अर्चना पांडेय,, आर्ची