नदियां पार सजन ,हम -तुम साथ
खुला आसमां,पहाड़ों की। हरियाली
लुफ्त उठाते ,खुशनुमा नजारे
हाथों में लिए ,चाय की प्याली 😊
कभी मैं निहारु,कभी तू निहारे
यह शाम बड़ी है मतवाली
लगे मौसम यह सुहावना
है दूर हमसे ,सारा जमाना 💖
प्यार का खूबसूरत एहसास
प्रकृति के हम -तुम पास
साथ हमारा ,यहां आना 😍
नदियां की निश्चल धार
उज्जवल नीला आकाश
सुंदर पर्वत,ओढ़े है हरियाली
बंधे हम ,प्रकृति के मोहपाश
नदिया पार सजन "हम-तुम" साथ
💖 🌹 😍 💖 😍 🌹 💖
मनीषा भुआर्य ठाकुर(कर्नाटक)

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