यादव जी बहुत उदास थे , घर में आज उनका मन नहीं लग रहा था तो वह पार्क चले गए । एक बेंच पर बैठे अपने बीते दिनों को याद करते रहे । तभी पीछे से किसी ने उनके कंधे पर हाथ रखा । घूम कर देखा तो उन्हीं की उम्र का एक व्यक्ति मुस्कुराते हुए 'नमस्ते ' कह रहा था । यादव जी ने याददाश्त पर जोर डाला , पर वे इस व्यक्ति को पहचान नहीं पाए । तब उसी ने कहा मेरा नाम राजेश मौर्य हैं । आपको पार्क में पहली बार देखा है । हम यहां लगभग रोज ही आते हैं । आप को अकेले देखा तो बात करने चला आया , यदि कोई परेशानी ना हो तो आप हमारे साथ वहां पर बैठ सकते हैं। यादव जी का दिल नहीं कर रहा था वे तो अकेले आंसू बहाना चाहते थे । पर जब उन्होंने उस तरफ देखा जहां और भी लोग बैठे थे , उन सब ने उनकी तरफ हाथ हिलाया इसलिए यादव जी मना नहीं कर सके ।
उन सब ने यादव जी का स्वागत किया और सब बातें करने लगे । कोई चुटकुला सुना रहा था , कोई बीती यादों में से कोई मीठी गुदगुदाती हुई बात सुना रहा था और सब हर बात पर जोर जोर से हंस देते थे । यादव जी को थोड़ा अजीब लग रहा था । वे ठीक से मुस्कुरा भी नहीं पा रहे थे । तभी राजेश ने कहा - "यादव जी , लगता है आप किसी बात से परेशान हैं । आप हमें बता सकते हैं शायद हम आपके कुछ काम आ
सके ।" तब यादव जी बोले - "मेरा इकलौता बेटा कल विदेश जा रहा है आगे की पढ़ाई करने , वह चला गया तो मैं अकेले रह जाऊंगा ।" शर्मा जी बोले - "तो आप भी साथ चले जाइए।" नहीं , मैं विदेश नहीं जाना चाहता।" "मुझे लगता है, आपका बेटा पढ़ने में बहुत अच्छा होगा " राजेश ने कहा ।
"हां, उसे छात्रवृत्ति मिली है वहां पढ़ने के लिए ।"
"फिर तो आप उसे जाने दे ,अगर आप उसे रोकेंगे तो यह उसके साथ गलत होगा । आप उसकी तरक्की में बाधा ना डालिए और उसे हंसी खुशी विदा कीजिए ।" राजेश ने कहा ।
शर्मा जी बोले -"आप अकेले नहीं रहेंगे , हम सब यहां पर इकट्ठे होते हैं , एक दूसरे की परेशानियां सुनते हैं और दूर करने की कोशिश करते हैं । हमारा बुढ़ापा किसी पर बोझ नहीं है । यह मोहम्मद साहब हैं जो अपनी कॉलोनी के सबसे चहेते बुड्ढे हैं , इनके घर में सब हैं और सब इनसे खुश है क्योंकि यह उनकी मर्जी से उनको जीने देते हैं और अपनी मर्जी से खुद जीते है । जो मदद कर सकते हैं करते हैं , घर में ही नहीं मोहल्ले में भी देखो कितना खुश रहते हैं । और यह डिसूजा जी हैं जो पास में झोपड़पट्टी है वहां रोज बच्चों को पढ़ाने जाते हैं और दिन के 4 घंटे यह वहीं पर रहते हैं ।यह दयाल जी हैं , हम सब बुड्ढों में सबसे ज्ञानी , देश-दुनिया समाज में क्या हो रहा है सब की खबर रखते हैं और किसी को भी किसी प्रकार की सहायता चाहिए होती है तो सबसे पहले पहुंचते हैं।"
"आप अपने आप को अकेला ना समझें हम में से कई लोग बिल्कुल अकेले हैं बच्चे अपने नौकरियों की वजह से बाहर रहते हैं या उनका ट्रांसफर होता रहता है हम कहां-कहां उनके साथ भटकेंगे और फिर नई जगह में दिल भी नहीं लगता है ।"
डिसूजा ने कहा ।
"यादव जी आपको कोई पुराना शौक हो जो घर गृहस्थी के चक्कर में पूरे ना कर पाए हो , अब वक्त है अब अपने शौक पूरे करो ।" बरोलिया जी ने कहा ।
यादव जी जो अब तक थोड़े संयत हो गए थे बोले- " अब बुढ़ापे में कौन से शौक पूरे करे ।" तब चड्डा जी बोले -" यादव जी , यहां पर बुढ़ापा बोलना और रोना बिल्कुल मना है ।" यादव जी मुस्कुराए और बोले - "मुझे गिटार बजाने का शौक था और मैं अपने लिए एक अच्छा वाला गिटार लेना चाहता था पर वह चाहत कब दब गई पता ही ना चला ।"
"तो ठीक है , आप गिटार खरीदो , सीखो और फिर एक दिन पार्टी करेंगे उसमें आपका प्रोग्राम रखेंगे ।" चड्डा जी बोले ।
सब हंसने लगे अब राजेश जी बोले -"समस्याएं इतनी बड़ी होती नहीं है जितनी हम समझते हैं । गुप्ता जी और कश्यप जी बिल्कुल अकेले हैं , कोई खाना बनाने वाला तक नहीं है । कुंतल जी की बहू पहले नौकरी करती थी, पर अब उसके पास छोटा बच्चा है तो नौकरी छोड़ दी । यह दोनों उनके घर ही खाना खाते हैं । दोनों उस बच्चे से खेलते हैं, इतने में बहु खाना बना लेती है । कई बार बहू की मदद भी कर देते हैं । होटल में बेकार खाने के पैसे देने से अच्छा है बहू को अच्छे खाने के पैसे दे । इन्होंने जगह-जगह फलों के पौधे लगाए हैं, तो सारा दिन उन पौधों की देखभाल करते हैं, इन्हें समय का पता ही नहीं चलता । पहले घर गृहस्थी में हमें अपने लिए समय नहीं मिलता था, अब हमारे पास समय ही समय है तो हम इस समय का सही इस्तेमाल करके, बाकी जीवन को खुशगवार बना सकते हैं ।"
"उदासियों से रोना आएगा और मुस्कुराने से हंसी " इसलिए हमेशा मुस्कुराओ । यादव जी समझ गए थे कि अब उन्हें क्या करना है ।



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