सुख के आधार सुखसागर में,
नत्मस्तक हमारा नव वंदन है...
सुखी रहे परिवार आनंदमय,
कोटी-कोटी अभिनंदन है...


मौलिक जगत के 'हे ब्रह्म',
मेरे परिवार सुधारक...
सबमें ईमान का गुण हो,
और प्रतिष्ठा हो जनदायक...


मातृभूमि के हम सब तनधारी,
आज्ञा ही शिरोधारी बने...
पितृजनो का मान बढ़ाऊँ,
कर्मवीर परिवार कहे...



   लेखक:- विकास कुमार लाभ
                  मधुबनी(बिहार)