खोजने होते हैं बस वो चार लोग,
चुनने होते हैं बस वो चार लोग,
साथ आपके जो बिन लोभ हो
सम्हालने होते हैं बस वो चार लोग...।

क्या करोगे मिथ्या हजारों का,
जोड़ के मजमा बाजारों सा,
जब वक्त आया कहारों का,
तो पीठ दिखाते वो लाचार लोग
साथ आपके जो बिन लोभ हो
सम्हालने होते हैं बस वो चार लोग...।

मुसीबत देख जो किनारे हो जाये,
कठिन वक्त में जो साथ न निभा पाये,
दूर तलक नजरें, अपनो को न पायें,
क्या फायदा ढोने से बेकार बोझ
साथ आपके जो बिन लोभ हो
सम्हालने होते हैं बस वो चार लोग...।

चिन्ता नहीं जिसे आपकी दौलत की,
चाह नहीं जिसे आपकी शौहरत की,
न उनको कसम दी,न कोई शर्त थी,
बस दुआयें मांगते रहे वो चार लोग
साथ आपके जो बिन लोभ हो
सम्हालने होते हैं बस वो चार लोग...।

चार लोग समाज में हर तरह के हैं,
भलाई-बुराई सारी इन्हीं से है,
नजरें इनकी हरदम आप पर हैं,
आप अतिरिक्त चुनिए वो चार लोग
साथ आपके जो बिन लोभ हो
सम्हालने होते हैं बस वो चार लोग...।

स्वरचित व मौलिक✍
सुमित सिंह पवार "पवार"
उत्तर प्रदेश पुलिस
आगरा