इंसान हो इंसानियत का वास्ता तुम्हें
किसी के काम आ सको कुछ नेकियां करो!!
आए हो धरती पर ,बनके तुम इंसा
मजबूर की मदद करो, खुशियां करो फिदा !!
ये जान लो कि आज कोई मजबूर हो गया,
ज़िंदगी की धूप से बेजार हो गया !!
रोती हुई आंख में जब देखो तुम आंसू,
पोंछ कर उस आंख को,मुस्कान दो सजा !!
पत्थरों को पूजते मंदिर में हम यहां
गरीब के आंगन का चूल्हा बुझा यहां!!
औरों को ज़ख्म देकर खुश हो रहे यहां,
इंसानियत को दागदार कर रहे यहां !!
दुनिया में सब मिलेगा ,मिलता सुकुं नहीं,
जन्नत मे सब मिलेगा हैवानियत नहीं,
इंसान मे सब है,मगर इंसानियत नहीं!!
इंसान हो इंसानियत का वास्ता तुम्हें,
किसी के काम आ सको कुछ नेकियों करो!!!
स्वरचित , मौलिक सर्वाधिकार सुरक्षित -----
कीर्ति चौरसिया
जबलपुर ( मध्य प्रदेश)

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